लूट का लाइव वीडियो: स्कूटी सवार व्यवसायी पर हमला, 20 लाख रुपए से भरा बैग लूटकर बदमाश फरार

रविवार की रात अनिल अग्रवाल के लिए किसी भी आम दिन जैसी ही शुरू हुई थी। रोज की तरह उन्होंने राम मंदिर के पास स्थित अपनी दुकान बंद की, कैश गिनकर बैग में रखा और स्कूटी से घर के लिए निकल पड़े। घर ज्यादा दूर नहीं था—सिर्फ 300 मीटर। उन्हें क्या पता था कि यह छोटा सा सफर उनकी जिंदगी का सबसे डरावना अनुभव बन जाएगा और मेहनत की कमाई पल भर में छिन जाएगी।
अनिल अग्रवाल अंबिकापुर के जाने-माने व्यवसायी हैं। मोबाइल कंपनियों के डीलर और हिंदुस्तान यूनिलीवर की फ्रेंचाइजी संभालने वाले अनिल का दिन सुबह से देर रात तक व्यस्त रहता है। परिवार के लिए बेहतर भविष्य, कर्मचारियों की जिम्मेदारी और व्यापार को आगे बढ़ाने का सपना—यही उनकी जिंदगी की दिनचर्या थी। रविवार को भी दुकान पर अच्छा कारोबार हुआ था। उन्होंने दिनभर की कलेक्शन को बैग में रखा और संतोष के साथ घर की ओर निकल पड़े।
जब वे सत्तीपारा इलाके में रानी सती मंदिर कॉलोनी की ओर मुड़े, तभी अचानक सब कुछ बदल गया। सामने से आए एक व्यक्ति ने बिना कुछ कहे उनके सिर पर बांस के मोटे डंडे से जोरदार वार कर दिया। एक पल में ही अनिल का संतुलन बिगड़ गया। स्कूटी फिसल गई और वे सड़क पर गिर पड़े। दर्द और अंधेरे के बीच उन्हें बस इतना याद है कि वे कुछ समझ पाते, उससे पहले ही बेहोश हो गए।
जब होश आया तो खुद को अस्पताल के बिस्तर पर पाया। सिर में तेज दर्द, आंखों के सामने धुंध और मन में डर। डॉक्टरों ने बताया कि सिर में गंभीर चोट आई है, गनीमत रही कि जान बच गई। परिवार के चेहरे पर चिंता और आंखों में आंसू देखकर अनिल खुद को संभाल नहीं पाए। उन्हें बार-बार यही ख्याल आ रहा था कि मेहनत की कमाई और सुरक्षा—दोनों एक झटके में खत्म हो गए।
अनिल की पत्नी बताती हैं कि उस रात फोन आने के बाद पूरा परिवार घबरा गया था। “हमें बस इतना बताया गया कि सड़क पर हमला हुआ है। जब अस्पताल पहुंचे और उन्हें इस हालत में देखा, तो पैरों तले जमीन खिसक गई,” उन्होंने कहा। बच्चे सहमे हुए हैं और बार-बार यही पूछ रहे हैं कि पापा के साथ ऐसा क्यों हुआ।
घटना के बाद जब अनिल को पूरी बात पता चली कि बैग में रखे करीब 20 लाख रुपए लूट लिए गए हैं, तो उनका दिल बैठ गया। यह सिर्फ पैसा नहीं था, बल्कि दिनभर की मेहनत, कर्मचारियों की तनख्वाह, सप्लायर्स का भुगतान—सब कुछ उसी बैग में था। अनिल कहते हैं, “पैसा तो फिर कमा लेंगे, लेकिन जो डर मन में बैठ गया है, वह कैसे जाएगा?”
इस घटना ने सिर्फ अनिल को ही नहीं, बल्कि पूरे व्यापारिक समुदाय को झकझोर दिया है। आसपास के दुकानदारों का कहना है कि अनिल जैसे सीधे-सादे व्यापारी पर हमला होना किसी को भी असुरक्षित महसूस करा सकता है। एक दुकानदार ने कहा, “अगर रोज मेहनत करके कमाने वाला आदमी भी सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी क्या करे?”
पड़ोसियों का कहना है कि अनिल हमेशा समय पर घर लौटते थे और किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। यही वजह है कि इस हमले ने सभी को चौंका दिया है। लोग अब शाम ढलते ही दरवाजे बंद करने लगे हैं और अकेले बाहर निकलने से डरने लगे हैं।
अस्पताल में इलाज के दौरान अनिल बार-बार यही सोचते हैं कि अगर हमला थोड़ा और जोरदार होता, तो क्या वे अपने परिवार को फिर देख पाते? यह सोच उनके रोंगटे खड़े कर देती है। वे कहते हैं, “मैं बस चाहता हूं कि जिसने यह किया है, उसे सजा मिले, ताकि किसी और के साथ ऐसा न हो।”
पुलिस की जांच और सीसीटीवी फुटेज की चर्चा के बीच अनिल का परिवार एक ही उम्मीद लगाए बैठा है—न्याय की। उन्हें भरोसा है कि पुलिस आरोपियों को पकड़ेगी, लेकिन मन के भीतर डर अब भी है। रात होते ही परिवार के सदस्य खिड़की-दरवाजे बार-बार जांचते हैं।
यह घटना बताती है कि अपराध सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि मन को भी गहरी चोट पहुंचाता है। अनिल अग्रवाल की कहानी आज अंबिकापुर के हर व्यापारी और आम नागरिक की कहानी बन चुकी है—जो मेहनत करता है, सपने देखता है और बस सुरक्षित घर लौटना चाहता है।



