दिल्ली में बीजेपी बूथ एजेंट ने मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने के लिए फॉर्म भरे

दिल्ली के मुस्तफाबाद के दयालपुर इलाके में बीजेपी बूथ एजेंट ने मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 भरे हैं। इस कदम से स्थानीय मुस्लिम समुदाय में तनाव देखा जा रहा है।
बीजेपी बूथ एजेंट द्वारा नाम हटाने की याचिका
दिल्ली के नॉर्थईस्ट इलाके के मुस्तफाबाद में दयालपुर निवासी दर्जी सजिद हुसैन ने बुधवार, 28 अक्टूबर को जानकारी पाई कि उनके परिवार के सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए फॉर्म 7 के तहत आवेदन दायर किए गए हैं। उनकी पत्नी अफसाना खातून और बेटे असद रजा जैदी के खिलाफ ये आवेदन इस विशेष सघन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के दौरान किए गए।
सजिद हुसैन ने कहा कि उन्हें पता नहीं कि इस कार्रवाई के पीछे कौन है। आवेदन में उनके परिवार के सदस्यों के नाम हटाने की वजह ‘गैरमौजूदगी/स्थायी स्थानांतरण’ या ‘मृत्यु’ बताई गई है। कुल 28 वोटरों के खिलाफ इसी तरह के लेख हटाने के लिए याचिकाएं दी गई हैं।
चंद्र शेखर नैनवाल और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड
आवेदन श्री चंद्र शेखर नैनवाल द्वारा भरे गए हैं, जो भारतीय जनता पार्टी के बूथ-स्तर के एजेंट-2 (BLA-2) के रूप में काम कर रहे हैं। ये जानकारी चुनाव आयोग के रिकॉर्ड से मिली है।
इस मामले में मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया चुनाव आयोग द्वारा आयोजित सघन पुनरीक्षण के तहत की जा रही है। मगर इस तरह के कदम से संबंधित समुदाय में चिंता भी बढ़ी है और सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह राजनीतिक दबाव का हिस्सा हो सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे फॉर्म दायर करने से उनकी पहचान और मताधिकार खतरे में आ सकते हैं। इस प्रकार की याचिकाओं का गलत इस्तेमाल मतदाता सूची से लोगों को बाहर करने के लिए हो सकता है।
सफाई से यह समझना महत्वपूर्ण है कि फॉर्म 7 के तहत नाम संपादन या हटाने के लिए शिकायतकर्ता का वैध कारण होना चाहिए और चुनाव आयोग इसे सही ढंग से जांचता है। फिर भी इस तरह के मामले संवेदनशील होते हैं और उनकी गंभीरता को समझना जरूरी है।
चुनाव आयोग ने इस महिला का नाम झूठे आरोपों से बचाने के लिए अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि सभी याचिकाओं की जांच प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जाती है।
इस घटना से स्पष्ट होता है कि चुनावी प्रक्रियाओं में मतदाता सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण है। स्थानीय समुदाय और अधिकारवादी निगरानी टीम इस मामले को करीब से देख रहे हैं।
अंत में, यह जांच अभी जारी है और आगे की कार्रवाई चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित की जाएगी। श्रेय इस मामले को मंथन और समयबद्ध तरीके से सुलझाने की प्रक्रिया को दिया जाना चाहिए।




