पॉलिटिक्स

INDIA ब्लॉक बैठक: ग्यानेश कुमार को हटाने और EC के खिलाफ रैलियों का आह्वान

भारत की राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को हुई INDIA ब्लॉक की बैठक में विपक्ष ने कथित वोट चोरी के मुद्दे को लेकर सड़कों पर जाने का फैसला किया। इस बैठक में 19 राजनीतिक पार्टियों और एक स्वतंत्र गठबंधन ने एक साथ मिलकर देशव्यापी रैलियों और जिला स्तर की प्रदर्शनियों का कार्यक्रम बनाया। विपक्ष ने 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के सामने भी एक मार्च का आयोजन करने का निर्णय लिया।

विरोध का स्वरूप और योजनाएं

बैठक में एक छह बिंदुओं वाला कार्यक्रम तय किया गया है जिसमें 2 से 8 अक्टूबर के बीच ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च शामिल हैं। 1 नवंबर को दिल्ली में एक बड़े रैली का भी आयोजन होगा। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के लिए अक्टूबर और नवम्बर के महीने में पाँच बड़ी रैलियां आयोजित की जाएंगी, जिनमें दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता और बेंगलुरु प्रमुख शहर होंगे। पांचवें शहर के चयन पर अभी विचार चल रहा है।

बैठक में चुनाव आयोग, चुनावी तकनीक, मतदाता पहचान कार्यक्रम (SIR) और दलों के जमीन स्तर की समन्वय प्रक्रिया पर चर्चा हुई। विरोधी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार को हटाने की मांग का भी समर्थन किया।

नेताओं के विचार और आगे की रणनीति

राहुल गांधी ने बैठक की शुरुआत पश्चिम बंगाल में होने वाली मत चोरी के मुद्दे से की और जुलाई में कोलकाता में ईवीएम के जलने की घटना को चुनौती दी। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पक्ष में आवाज उठाई, जो निर्वाचन कार्यों की प्रक्रियाओं में अनियमितताओं पर चुनाव आयोग की आलोचना कर रही हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पार्टी भविष्य में गुबक्से मतदान व्यवस्था (बैलट पेपर) को पुनः लागू करने की मांग करेगी। उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त मोदी और अमित शाह के प्रभाव में काम कर रहे हैं और उनकी तत्काल नियुक्ति समाप्त होनी चाहिए।

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि विपक्ष को चुनाव आयोग के खिलाफ कानूनी कारवाई भी करनी चाहिए और सुझाव दिया कि चुनाव आयोग की आईटी प्रमुख सीमा खन्ना के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए। साथ ही, ममता टुकड़ा इस सहयोगी प्रस्ताव का समर्थन कर सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका दाखिल करने पर सहमति बनी।

टीएमसी सांसद लोगों ने फॉर्म 6 से जुड़े मतदाता नामांकन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। वहीं, सीपीआई ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और सेवा शर्तों को नियंत्रित करने वाले 2023 के कानून को निरस्त करने की मांग की। राकांपा समेत कुछ दलों की मौजूदगी नहीं रहने पर भी खड़गे ने कहा कि उन्हें बुलाया गया था लेकिन वे बैठक में शामिल नहीं हुए।

तेजस्वी यादव ने उपसमितियां और संवाद के लिए प्रवक्ता नियुक्त करने का सुझाव दिया ताकि दलों के बीच बेहतर तालमेल बना रहे। उन्होंने बिहार चुनाव में हुए नुक्सान की बात करते हुए जमीन स्तर पर सहयोग और बैठकों के आयोजन की जरूरत बताई।

उद्धव ठाकरे और हेमंत सोरेन ने वर्चुअली शामिल होकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और राजनीतिक दलों के विभाजन पर कड़ी आलोचना की। ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयोग की नीतियां लोकतंत्र के लिए खतरनाक हैं और मुंबई में 2 अक्टूबर को होने वाली आंदोलन में सभी को जुड़ना चाहिए। इस बैठक में एकता और लोकतंत्र की रक्षा को लेकर विपक्ष के सब दलों ने मजबूत संकल्प दिखाया।

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