स्वास्थ्य

भारत में पर्याप्त खाने के बावजूद छिपे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी पर डॉक्टरों की चेतावनी

भारत में पर्याप्त खाना खाने के बाद भी कई लोगों में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी हो सकती है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। डॉक्टरों के अनुसार, केवल कैलोरी की पूर्ति से जरूरी विटामिन और खनिजों की कमी नहीं होती। यह समस्या देश में व्यापक रूप से देखी जाती है।

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी का खतरा

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के अनुसार, भारत में 15 से 49 वर्ष की 57.2% गैर-गर्भवती महिलाओं और 52.2% गर्भवती महिलाओं में एनीमिया पाया गया है। यह समस्या आयरन, विटामिन बी12, और विटामिन डी की कमी के कारण होती है। पुनः, कुम्भकर्णिन सर्वेक्षण (CNNS) में भी किशोरों में इन पोषक तत्वों की कमी देखी गई है।

डॉ. सोनाली गोखले, P&G हेल्थ इंडिया की मेडिकल अफेयर्स हेड, बताती हैं कि भारत में कैलोरी पर्याप्त होने के बावजूद पोषण की गड़बड़ी बनी हुई है, जो लंबी अवधि में थकान, ध्यान की कमी और कमजोरी जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकती है।

आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और उनका महत्व

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स जैसे आयरन, विटामिन बी12, विटामिन डी और ई शरीर के सामान्य विकास, रक्त निर्माण, तंत्रिका तंत्र के स्वास्थ्य, और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए जरूरी हैं। इनकी कमी से न केवल एनीमिया बल्कि काम करने की क्षमता में भी गिरावट होती है। विटामिन बी12 खासतौर पर मांसाहारी खानपान न करने वाले लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होती है क्योंकि यह मुख्यतः पशु स्रोतों में पाया जाता है।

इसके अलावा, विटामिन डी की कमी भारत में सूरज की पहनी मौजूदगी के बावजूद आम समस्या है, जिसके कारण हड्डियों और मांसपेशियों की कमजोरी हो सकती है। विटामिन ई एक महत्वपूर्ण एंटीऑक्सिडेंट है जो कोशिकाओं की सुरक्षा करता है।

एक संतुलित और विविध आहार में cereals, pulses, सब्जियां, फल, दूध तथा पशु-आधारित खाद्य पदार्थ जैसे अंडे और मांस शामिल करने की सलाह दी जाती है। इसके बावजूद, कई बार भोजन से पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, इसलिए आवश्यकतानुसार फोर्टिफाइड फूड या सप्लीमेंटेशन से मदद लेनी चाहिए।

व्यक्ति के आयु, लिंग, स्वास्थ्य स्थिति और खानपान के अनुसार पोषण की जरूरतें बदलती रहती हैं। इसलिए बिना जांच के स्वयं से सप्लीमेंट्स लेना हानिकारक भी हो सकता है। खासकर विटामिन ए, डी, ई और के जैसे फैट में घुलनशील विटामिन का अत्यधिक सेवन शरीर में जमा होकर नुकसान पहुंचा सकता है।

भारत में पोषण संबंधी नीतियों का मुख्य फोकस अब भी अन्न सुरक्षा और कुपोषण रोकने पर है, लेकिन माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी को भी गंभीरता से लेना आवश्यक है। बेहतर पोषण के लिए केवल भरपेट खाना ही नहीं, बल्कि उचित पोषक तत्वों से भरपूर आहार सुनिश्चित करना जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लगातार थकान, कमजोरी या बार-बार बीमार पड़ना जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसे लक्षणों के लिए डॉक्टर से परामर्श कर सही परीक्षण कराना और आवश्यक उपचार करना चाहिए। इस तरह के कदम से भारत में पोषण की स्थिति में सुधार संभव है।

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