ईरान में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े व्यक्ति को फांसी

ईरान ने शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को एक व्यक्ति को फांसी दी जो इस वर्ष की शुरूआत में सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान पुलिस अधिकारियों पर फायरिंग करने के आरोप में दोषी ठहराया गया था। सियावश जामशिदी को सुरक्षा कर्मियों पर हमला करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई।
गिरफ्तारी और सजा की पृष्ठभूमि
प्रदर्शन जनवरी में अपनी चरम सीमा पर पहुंचे थे, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे। तब से ईरानी अधिकारियों ने उन कैदियों की फांसी बढ़ा दी है, जिनका सम्बंध इस दंगाई गतिविधि से जोड़ा जा रहा है। अदालत ने जामशिदी को “मोहरेबेह” यानी “खुदा के खिलाफ लड़ाई” के तहत मौत की सजा दी। इसके अतिरिक्त उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ साजिश बनाने, धोखाधड़ी, धमकी देने और चोरी समेत कई अन्य आरोप भी थे।
ईरान के न्यायिक विभाग की वेबसाइट मिज़ान ऑनलाइन के अनुसार जामशिदी ने अवैध सैन्य हथियार ले रखा था और उसने अपहरण, डराने-धमकाने के लिए हथियार दिखाने और जानबूझकर शारीरिक चोट पहुंचाने जैसी गतिविधियों में भी भाग लिया।
प्रदर्शनों की विशेषताएं और उनका प्रभाव
मिज़ान के मुताबिक, ये विरोध दिसंबर 2025 में ईरान में बढ़ती महंगाई और जीवन स्तर से जुड़ी नाराजगी के कारण शुरू हुए थे, जो जनवरी में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन के रूप में सामने आए। स्थानीय अधिकारियों ने इन हंगामों में 3,000 से अधिक मौतों की पुष्टि की है और हिंसा को आतंकवादी गतिविधियों के रूप में बताया है, जिनका समर्थन अमेरिका और इज़राइल द्वारा किया गया।
हालांकि, विदेशों में आधारित गैर-सरकारी संगठनों का दावा है कि ईरानी सुरक्षा बलों ने ही प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान में सैन्य हस्तक्षेप की धमकी दी थी। फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त हमला शुरू किया, जिसने मध्य पूर्व में युद्ध को बढ़ावा दिया।
तब से, ईरान में गिरफ्तारियां और फांसी की सजा दोनों युद्ध और प्रदर्शन से जुड़े मामलों में तेजी से बढ़े हैं। 2025 में ईरान में 1,639 से अधिक लोगों को फांसी दी गई, जो 1989 के बाद से सबसे अधिक संख्या थी। अमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, ईरान चीन के बाद सबसे अधिक फांसी करने वाला देश है।
इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समुदाय में व्यापक चिंता उत्पन्न की है। अधिकारियों का कहना है कि ये कदम राष्ट्रीय सुरक्षा की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक प्रतिशोध और मानवाधिकारों का उल्लंघन मानते हैं।
ईरान में बढ़ते उत्पीड़न और कड़ी कार्रवाई के बीच मानवाधिकार समूह लगातार मामलों पर नजर बनाए हुए हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। भविष्य में इस क्षेत्र की स्थिति पर निगरानी रखना आवश्यक हो गया है।





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