कर्नाटक किसान संगठन ने MSP न बढ़ाने पर आंदोलन की चेतावनी दी

कर्नाटक के किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से गन्ने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने की मांग को तुरंत पूरा नहीं करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। कर्नाटक राज्य रैथा संघ और हसिरु सेना के अध्यक्ष चुन्नप्पा पुजरी ने यह चेतावनी बेलगावी में सोमवार को दी।
MSP बढ़ाने की मांग और केंद्र के फैसले का इंतजार
पुजरी ने बताया कि केंद्र सरकार ने गन्ने के लिए वर्तमान में ₹31 प्रति किलो MSP तय किया है, जिसे पिछले नौ वर्षों से संशोधित नहीं किया गया। किसान संगठन चाहते हैं कि इसे ₹60 प्रति किलो तक बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि यह मांग पूरी नहीं हुई तो वे खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्री प्रल्हाद जोशी द्वारा नई दिल्ली में बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं होंगे।
किसान नेताओं का कहना है कि उन्हें केंद्रीय अधिकारियों से अभी तक बैठक के लिए औपचारिक निमंत्रण भी नहीं मिला है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि गन्ने के उचित मूल्य, सभी राज्यों में इथेनॉल के लिए एकसमान मूल्य और शुगर का संशोधित MSP जल्द से जल्द घोषित किया जाए।
गन्ना किसानों की आर्थिक परेशानियां और समाधान की मांग
चुन्नप्पा पुजरी ने बताया कि गन्ना किसान खेती की बढ़ती लागत, बाजार तक पहुंच में दिक्कत और उचित मूल्य न मिलने जैसी समस्याओं का सामना कई वर्षों से कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर FRP और MSP बढ़ाए जाएं तो किसानों को उन खर्चों के अनुसार बेहतर आमदनी होगी।
इसके अलावा उन्होंने गन्ना कारखानों पर भी कड़ी कार्रवाई की मांग की, जो किसानों को FRP का भुगतान नहीं करते या देय राशि समय पर नहीं देते। उन्होंने कहा कि ऐसे कारखानों को दंडित करने के लिए कानून व्यवस्था स्पष्ट और सख्त होनी चाहिए।
किसान संगठनों का मानना है कि केंद्र सरकार की इस मांग को यदि शीघ्र नहीं माना गया तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की उपेक्षा न की जाए और गन्ना खेती को टिकाऊ बनाने के लिए MSP में वृद्धि आवश्यक है।
कर्नाटक सहित देश के कई हिस्सों में गन्ना किसानों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उनकी मांग है कि सरकार उनके उठाए गए मुद्दों का गंभीरता से समाधान करे ताकि खेती से जुड़ी उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।
यह आंदोलन किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और उचित भुगतान की जरूरत को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश है। किसान यह भी चाहते हैं कि केंद्र सरकार उनकी बातों को अनसुना न करे और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय ले।




