कर्नाटक सरकार 2028 चुनावों से पहले 50,000 करोड़ रुपये विकास कार्यों के लिए जुटाएगी

कर्नाटक सरकार आगामी दो वर्षों में लगभग 50,000 करोड़ रुपये जुटाकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की योजना बना रही है। यह राशि बजटीय आवंटन, डिसइन्वेस्टमेंट और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) जैसे माध्यमों से जुटाई जाएगी। इसका लक्ष्य 2028 विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में विकास को तेजी देना है।
विकास के लिए वित्तीय योजना
मुख्यमंत्री DK शिवकुमार के नेतृत्व वाली कैबिनेट के सामने यह प्रस्ताव अभी लाया जाना है। अधिकारियों के अनुसार, जुटाई गई धनराशि का सबसे अधिक उपयोग पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट, ग्रामीण सड़कों और शहरी विकास पर किया जाएगा। योजना के तहत करीब 20,000 करोड़ रुपये बजट से आएंगे, जबकि बाकी राशि टोल ऑपरेटर ट्रांसफर, PPP और डिसइन्वेस्टमेंट के जरिए जुटाई जाएगी।
शिवकुमार ने बैंगलोर में बड़े स्तर के विकास परियोजनाओं की घोषणा की है, जिन पर लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। इनमें से 40,000 करोड़ रुपये सुरंग सड़कों, फ्लाईओवर, एलिवेटेड हाईवे आदि पर खर्च किए जाएंगे।
प्रमुख परियोजनाएं और वित्तीय चुनौतियां
18 सितंबर को मंगलुरू में हुई कैबिनेट बैठक में 32,611 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की मंजूरी दी गई, जिनमें से 13,369 करोड़ रुपये करावली पैकेज के हैं और 10,800 करोड़ रुपये PPP मोड से आएंगे। हालांकि, वित्त विभाग ने सीमित वित्तीय संसाधनों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है।
चुनावों तक मात्र दो साल बचे हैं और कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं की लोकप्रियता कम होती जा रही है, इसलिए शिवकुमार सरकार विकास और बुनियादी ढांचे के लिए फंड आवंटित करने के लिए दबाव में है। वर्तमान में प्रत्येक वर्ष लगभग 52,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता है ताकि कांग्रेस की पांच गारंटी योजनाएं पूरी हो सकें।
शिवकुमार सरकार बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए हर संभव स्रोत से धन जुटाने की कोशिश कर रही है, जिससे प्रदेश में विकास को गति मिल सके और 2028 के विधानसभा चुनावों में सत्ता बरकार रहे।
PPP और टोल ऑपरेटर ट्रांसफर मॉडल
सरकार बेंगलुरु के आनंद राव सर्कल में ’ट्विन टावर्स’ परियोजना को पुनर्जीवित करने पर भी विचार कर रही है, जिसे पिछले साल लॉन्च किया गया था पर उसे उतनी प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस मॉडल के तहत सरकार अपनी आठ एकड़ ज़मीन का उपयोग करते हुए लगभग 20-25 लाख वर्ग फुट कमर्शियल स्पेस विकसित करना चाहती है, जिसमें एक टावर सरकारी उपयोग के लिए रहेगा और दूसरा डेवलपर को दिया जाएगा।
सरकार की योजना है सभी कार्यालयों को जो फिलहाल किराये की जगहों पर हैं, इस टावर में समाहित कर लागत कम करना और सेवाओं को एक छत के नीचे लाना। वहीं, डेवलपर्स इस ऑफिस स्पेस को किराए पर देकर निवेश पर रिटर्न पा सकेंगे।
उसके अलावा, टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (TOT) मॉडल के तहत सार्वजनिक परियोजनाओं को बोली के लिए रखा जाएगा। सफल बोलीदाता को प्रमुख सड़कों और हाईवे पर टोल वसूली का अधिकार मिलेगा, जिससे अतिरिक्त धन जुटाया जा सकेगा। ये सारी योजना 2028 के चुनाव के पूर्व तेजी से लागू की जाएंगी।





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