केरल हाईकोर्ट ने नियोजन बोर्ड परीक्षा की जांच में पीएससी की गैर-सहयोगिता पर नाराजगी जताई

केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को केरल पब्लिक सर्विस कमीशन (PSC) से नियोजन बोर्ड परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच में सहयोग न देने पर सवाल उठाया। न्यायमूर्ति ए. बादरुद्दीन ने इस मामले की जांच करते हुए कहा कि परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया में बड़ी साजिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि 58 अंकों के प्रश्नों का मूल्यांकन न होना खुद कानून का उल्लंघन है और यह एक गंभीर आरोप है।
पीएससी की जांच में बाधा और आयोग की दलीलें
पीएससी ने नौकरशाहों पर मुकदमा चलाने की सरकार की मंजूरी को रद्द करने और अपराध शाखा द्वारा दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के लिए रिट याचिका दायर की है। अदालत ने याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि आयोग के पास मामला है तो उसने अपराध शाखा को क्यों बयान नहीं दिया। आयोग ने कोर्ट में यह दलील दी कि 228 उम्मीदवारों के लिए प्रश्न संख्या 9 से 18 मूल्यांककों को नहीं भेजे गए, जो केवल एक कंप्यूटर समस्या थी।
न्यायालय ने कहा कि युवा पीढ़ी की उम्मीदों की रक्षा की जानी चाहिए और सर्विस कमीशन के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया किसी भी प्रकार के दबाव या हेरफेर से मुक्त होनी चाहिए। यह निर्देश भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए दिया गया।
आयोग के दावे और सरकार से स्वतंत्रता
पीएससी की याचिका में यह भी कहा गया है कि त्रुटियों को सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं और रैंक सूची तथा मूल्यांकन प्रक्रिया में पाए गए दोषों को ठीक किया गया है। आयोग ने कहा कि अर्थशास्त्र के प्रश्नों का उचित मूल्यांकनकर्ता को आवंटन नहीं होने के कारण उनका मूल्यांकन नहीं हो पाया।
इसके अलावा, पीएससी ने इस बात पर जोर दिया कि वे एक स्वायत्त संवैधानिक निकाय हैं और राज्य सरकार के नियंत्रण में नहीं आते। इसलिए उन्होंने कहा कि उनके सदस्यों का राज्य सरकार के मामलों से कोई संबंध नहीं है।
यह मामला मुख्यतः केरल राज्य नियोजन बोर्ड के उद्योग और अवसंरचना विभाग के प्रमुख पद की भर्ती परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें मूल्यांकन प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। अदालत का रुख साफ है कि जांच में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए और किसी भी पक्ष को जांच में बाधा नहीं डालनी चाहिए।
अदालत की ओर से प्रदर्शित कड़ी टिप्पणी का उद्देश्य इस प्रकार की नियुक्ति परीक्षाओं में विश्वास कायम रखना है ताकि युवाओं के भविष्य को उचित अवसर मिल सके। सरकारी कर्मियों पर जांच जारी है, और पीएससी को सहयोग करना अनिवार्य है।
इस जांच का परिणाम आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा कि क्या मूल्यांकन प्रक्रिया में साजिश थी और गलतियों के लिए कौन जिम्मेदार है। यह मामला सरकारी भर्ती प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता को भी उजागर करता है। इसके तहत सभी संबंधित पक्षों को निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ सहयोग करना होगा।





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