मल्लिकार्जुन खरगे के मोदी पर अभद्र टिप्पणी पर BJP का कड़ा विवाद

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पटना में हुए कार्यक्रम में खरगे की इस टिप्पणी को असंसदीय और अमर्यादित करार देते हुए पार्टी ने पूरे देश में 26 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
खरगे का विवादित बयान और उसकी पृष्ठभूमि
कार्यक्रम के दौरान जब किसी व्यक्ति ने कहा कि ‘मोदी कहीं नहीं जाएंगे’, तो मल्लिकार्जुन खरगे ने अप्रत्याशित प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” यह बयान 139वें श्री कृष्णा सिंह जयंती समारोह में सामने आया, जिसने पार्टी में हलचल मचा दी। इस घटना ने राजनीतिक विरोध की सीमाओं को भाजपा के शब्दों में “तोर फोड़” दिया है।
भाजपा के केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने खरगे की इस टिप्पणी को ‘‘असभ्य और असंसदीय भाषा’’ बताया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने मोदी या उनके परिवार के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया है। अमित शाह ने हालिया वर्षों में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की भाषा और राजनीतिक व्यवहार में गिरावट का आरोप लगाया।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया और कांग्रेस पर आरोप
BJP प्रमुख नितिन नाबिन ने कहा कि राजनीतिक विरोध की भी एक मर्यादा होती है, लेकिन सार्वजनिक मंच से दिवंगत परिवारजनों को लेकर अमर्यादित भाषा का उपयोग होना ‘‘कांग्रेस की संस्कृति’’ बन गया है। नाबिन ने इस बात पर जोर दिया कि यह केवल खरगे की बात नहीं बल्कि पूरे कांग्रेस संगठन की सोच का प्रतिबिंब है।
केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को मर्यादाएं समझनी चाहिए और जनता इस तरह की राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक माध्यमों से देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास अब कोई ठोस नीति नहीं बची है, बल्कि केवल अपशब्दों और गाली-गलौज की राजनीति बाक़ी रह गई है।
अमित शाह ने आगे कहा कि कांग्रेस ने मोदी जी की माता के लिए भी अपशब्द कहे, उन्हें ‘‘मौत का सौदागर’’ कहा और ‘‘चायवाला’’ कहकर आर्थिक स्थिति का मज़ाक उड़ाया। भाजपा ने इसे कांग्रेस की निराशा और बढ़ती हताशा की निशानी बताया है, जो लगातार चुनावी हार के कारण उत्पन्न हुई है।
भाजपा ने 26 अक्टूबर को इस विवाद को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आगाज़ किया, जिसमें पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक शामिल होंगे। इस प्रदर्शन का उद्देश्य कांग्रेस की इस भाषा के खिलाफ जनता का आक्रोश व्यक्त करना है।
कांग्रेस की इस हरकत को उनके नेतृत्व पर भी सवाल उठाने का मौका भाजपा नेताओं ने लिया है, जिसमें राहुल गांधी के राजनीतिक सिद्धांतों और विपक्ष की असहमति पर पार्टी की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए गए हैं। विपक्ष की भाषा और रवैये को लेकर भाजपा का कहना है कि यह राजनीतिक संस्कृति और शिष्टाचार के विपरीत है।
इस घटना से साफ होता है कि आगामी चुनावी माहौल और राजनीतिक बयानों में गर्माहट बढ़ रही है। राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी को देखकर यह भी संभव है कि जनता इस प्रकार की अभद्रता और घृणा से दूर रहे और विकास और मुद्दों की राजनीति को प्राथमिकता दे।




