वैश्विक स्थिति समाधान के लिए मध्य शक्ति दृष्टिकोण जरूरी: फ्रांसीसी मंत्री हद्दाद

फ्रांसीसी मंत्री-डेलीगेट बेंजामिन हद्दाद ने कहा है कि भारत और फ्रांस दोनों “रणनीतिक स्वतंर्तता” को लेकर समान सोच रखते हैं। यूरोपीय देशों में सुपरपावर यूएस और चीन के बीच अनिश्चितता के चलते अधिक “मध्य शक्ति गठबंधनों” के महत्व को समझा जा रहा है। दिल्ली में म्यूनिख लीडर्स मीटिंग के दौरान, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पहली बार बताया कि भारत रूस-यूक्रेन विवाद में मध्यस्थता के लिए प्रयासरत है। हद्दाद ने हिंदू को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि भारत अपनी “आवाज़” से रूस को शांति वार्ता की मेज तक लाएगा।
भारत-फ्रांस और यूरोपीय संघ के संबंध
हद्दाद ने कहा कि दिसंबर 16 को ब्रुसेल्स में होने वाले भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर अंतिम हस्ताक्षर करने का लक्ष्य है। फ्रांस इस समझौते का पूरा समर्थन करता है, क्योंकि यह दोनों पक्षों के द्विपक्षीय और व्यापक संबंधों को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता में सहयोग, बहुपक्षवाद और रणनीतिक स्वायत्तता की जरूरत है, जो भारत और फ्रांस को करीब लाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और फ्रांस सुपरपावर के मुकाबले मध्य शक्तियों के रूप में एक बेहतर गठबंधन बना सकते हैं। इसके तहत ये देश अपनी स्वतंत्रता और आवाज को सुरक्षित रखें। प्रौद्योगिकी क्षेत्रों जैसे अंतरिक्ष और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में दोनों के साझेदारी की बड़ी संभावनाएं हैं।
रूस-यूक्रेन विवाद और भारत की भूमिका
हद्दाद ने कहा कि भारत युद्ध को समाप्त करने के लिए शांति समाधान चाहता है, जैसा प्रधानमंत्री मोदी ने भी राष्ट्रपति पुतिन से कहा है। उन्होंने जोर दिया कि रूस को वार्ता की मेज तक लाने के लिए आर्थिक दबाव बढ़ाना आवश्यक है। यूरोपीय संघ अब तक रूस के खिलाफ 22 राउंड की प्रतिबंधात्मक नीति लागू कर चुका है। फ्रांस और यूरोपियन यूनियन ने यूक्रेन की मदद में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक यूरोपीय मुद्दा नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और कानून का सवाल है। रूस द्वारा अपने पड़ोसी देश पर सैन्य कार्रवाई और परमाणु धमकी देना विश्व की सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा है। इसलिए भारत जैसे वैश्विक सम्मानित देश की मध्यस्थता की जरूरत है।
हद्दाद ने अमेरिका और ईरान के मामलों पर भी कहा कि वे हमेशा तनाव में कमी और कूटनीतिक हल चाहते हैं। यूरोप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर डिप्लोमैटिक समाधान के लिए प्रयासरत हैं, जैसा कि 2015 के JCPOA के तहत हुआ था।
भारत और फ्रांस के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर IMEC परियोजना पर भी चर्चा हुई है। हद्दाद ने बताया कि मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति में जोखिम कम करने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा रास्ते तलाशने और निवेश बढ़ाने की जरूरत है। फ्रांस ने फारस की खाड़ी में नौसेना सुरक्षा संचालन में हिस्सा लेने की भी इच्छा जताई है।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ एक रणनीतिक जवाब की आवश्यकता है। IMEC इसके लिए दीर्घकालिक विकल्प हो सकता है।
समग्र रूप से, हद्दाद ने भारत और फ्रांस के बीच सहयोग बढ़ाने, FTA के बाद रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने और विश्व स्तर पर साझा आवाज बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और तकनीकी अग्रिमता के लिए काम कर सकते हैं।




