नागपुर में बनेगा C-390 विमान का असेंबली प्लांट, तमिलनाडु सरकार पर विपक्ष का हमला

महिंद्रा ग्रुप और ब्राजील की एयरोस्पेस कंपनी एंबरएर ने नागपुर, महाराष्ट्र को भारत में C-390 मिलेनियम मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान के फाइनल असेंबली लाइन (FAL) के लिए संभावित स्थल के रूप में चुना है। यह अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी उस समय सामने आई जब सरकार से आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का आह्वान किया गया ताकि जल्दी से जल्द इस परियोजना के लिए आधारभूत संरचना तैयार की जा सके।
प्रस्तावित विमान निर्माण परियोजना
यह असेंबली फैक्ट्री विमान की असेंबली, सिस्टम इंटीग्रेशन, मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग और स्थानीय सप्लाई-चेन विकास के कार्य संभालेगी। इस परियोजना को तब ही मंजूरी मिलेगी जब C-390 विमान भारतीय वायु सेना के मिडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) कार्यक्रम के लिए चुना जाएगा। भारतीय वायु सेना 60 विमान खरीदना चाहती है जो पुराने AN-32 और कुछ IL-76 विमानों की जगह लेंगे।
महिंद्रा ग्रुप ने खासतौर से महाराष्ट्र सरकार का धन्यवाद किया है जिन्होंने तेज़ी से जमीन आवंटित कर इस परियोजना को सुगम बनाया। हालांकि, इस निर्णय के पीछे सिर्फ महाराष्ट्र सरकार के सक्रिय सहयोग का ही हवाला दिया गया है, जबकि तमिलनाडु के उद्योग विभाग से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
तमिलनाडु सरकार पर विपक्ष का आरोप
इस फैसले के बाद तमिलनाडु की वर्तमान सरकार तमिलग वेत्री कझगम (टीवीके) पर विपक्षी दलों ने तीखा हमला बोला है। वे सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि वह या तो बड़े औद्योगिक परियोजनाओं को गंवा रही है या जोखिम में डाल रही है। विशेष रूप से उन्होंने राजकीय विमानन केंद्र के तौर पर अपनी स्थापित मांग वाले सुलूर और होसूर जैसे स्थानों को एंबरएर की टीम के समक्ष दिखाने के बावजूद यह परियोजना गंवाने का हवाला दिया।
पूर्व उद्योग मंत्री टी.आर.बी. राज्ञ ने कहा कि यह कोई साधारण कारखाना नहीं है बल्कि विमान असेंबली, सिस्टम इंटीग्रेशन और एयरोस्पेस सप्लाई चेन जैसे हजारों नौकरियां समेत बड़ी निवेश योजना है, जिसे टीवीके सरकार ने खो दिया। उन्होंने सवाल उठाए कि तमिलनाडु में विमान निर्माण का इकोसिस्टम मौजूद है फिर महाराष्ट्र को यह योजना क्यों मिली।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नारायणन थिरुपाथी ने भी कहा कि 6000 करोड़ रुपये की इस परियोजना को लेने में तमिलनाडु सरकार की कमी स्पष्ट नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उच्च स्तर पर इसका पीछा नहीं किया जबकि महाराष्ट्र ने जमीन आवंटित कर इसे सुलझा लिया।
वहीं, तमिलनाडु के उद्योग मंत्री एस. कीरथना ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि मई से उनकी सरकार के कार्यकाल में कोई भी निवेश परियोजना नहीं छूटी है। उन्होंने पूर्व सरकार पर 3.3 लाख करोड़ की परियोजनाएं अन्य राज्यों को गंवाने का आरोप लगाया, जिनमें टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, माइक्रॉन टेक्नोलॉजी, सुजुकी मोटर जैसी कंपनियों के निवेश शामिल हैं।




