तुमकुदु और मुरासु चक्रवात के बाद पांच मछुआरों की खोज तेज: तमिलनाडु सरकार

चक्रवात मुरासु के चलते कासिमेडु के पांच लापता मछुआरों की खोज को तेज कर दिया गया है। यह जानकारी एक अधिकारी ने शुक्रवार, 6 नवंबर को दी। तमिलनाडु के वित्त मंत्री एन. मेरी विल्सन आंध्र प्रदेश में तैनात हैं ताकि खोज कार्य में तेजी लाई जा सके। वहीं, डीएमके सांसद कनिमोझी ने राज्य सरकार पर रेस्क्यू ऑपरेशन में धीमी प्रतिक्रिया लेने का आरोप लगाया है।
मछुआरों का मामला और खोज अभियान
कासिमेडु के नौ मछुआरे 29 अक्टूबर को चक्रवात के दौरान चेन्नई से निकले थे। लेकिन उनके नाव को 3 नवंबर को आंध्र प्रदेश के रामायपटनम बंदरगाह के पास इंजन खराबी का सामना करना पड़ा। 5 नवंबर को भारतीय तट रक्षक बल ने प्राकाशम जिले के तट और समुद्र में चार शव बरामद किए हैं।
इस समय भारतीय तट रक्षक बल खोज अभियान में लगे हैं ताकि लापता पांच मछुआरों का पता लगाया जा सके। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के आदेश पर वित्त मंत्री मेरी विल्सन खोज संचालन की निगरानी कर रहे हैं।
सरकारी प्रतिक्रियाएं और आलोचना
डीएमके सांसद कनिमोझी ने राज्य सरकार की इस मामले में कथित गैर-जिम्मेदारी और देरी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए पूछा कि लापता मछुआरों की सूचना मिलने के बाद भी सरकार ने तुरंत कार्यवाही क्यों नहीं की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मछली पालन मंत्री ने पीड़ित परिवारों से मिलने की जहमत क्यों नहीं की।
वहीं वित्त मंत्री मेरी विल्सन ने बताया कि दुर्घटना वाले मछली पकड़ने वाले नाव पर आवश्यक सुरक्षा उपकरण, वाणिज्यिक बीमा और जरूरी दस्तावेज मौजूद नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अब समुद्री सुरक्षा प्रोटोकॉल और उनके कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करेगी ताकि ऐसे हादसे आगे न हों।
मुख्यमंत्री विजय ने मछुआरों की मौत पर शोक जताते हुए प्रत्येक परिवार को 7 लाख रुपये की प्रारंभिक राहत राशि मंजूर की है। सरकार ने वहीं शवों को आंध्र प्रदेश स्थित ओंगोले के आरआईएमएस अस्पताल से चेन्नई के कासिमेडु तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ली है।
मंत्री विल्सन के आंध्र प्रदेश जाने से पहले मछुआरा परिवारों और महिलाओं ने उनको घेरे रखा और प्रशासनिक देरी को लेकर सवाल उठाए। विपक्षी नेता उदयानिधि स्टालिन ने भी सरकार को कठोर शब्दों में नसीहत देते हुए पूछा कि मौसम की चेतावनियों के बावजूद नाव को समुद्र में क्यों जाने दिया गया। उन्होंने क्षतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग भी की।
यह मामला तमिलनाडु सरकार की समुद्री सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। खोज अभियान अभी जारी है और लापता मछुआरों की खोज पर पूरा ध्यान है।




