राष्ट्रीय

परम्बिकुलम में विलुप्त समझी पौधा वन्यजीव सप्ताह की स्टार बनी

परम्बिकुलम के जंगल में एक बार विलुप्त समझा जाने वाला पौधा हप्लोथिस्मिया एक्सानुलाटा फिर से मिला है, जिसने वन्यजीव सप्ताह की प्रदर्शनी का विषय बनकर ध्यान आकर्षित किया है। यह पौधा 26 साल पहले खोजा गया था, जिसके बाद इसे संरक्षण और अध्ययन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है।

हप्लोथिस्मिया प्रदर्शनी और वन्यजीव सप्ताह

“हप्लोथिस्मिया” नामक प्रदर्शनी परम्बिकुलम में आयोजित की गई है, जो 8 अक्टूबर तक चल रही है। लिमिटेड अवधि की इस प्रदर्शनी का उद्घाटन परम्बिकुलम टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर उमा टी. ने किया। इस आयोजन में परम्बिकुलम के वन्यजीव, प्राकृतिक दृश्य और जैविक धरोहर की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। प्रदर्शनी का विषय “छोटे आश्चर्य, वाइल्ड लैंडस्केप्स, साझा कल” है, जो वन्यजीवन की जटिलता पर जोर देता है।

परम्बिकुलम आमतौर पर अपने बाघ, हाथी और हर्नबिल पक्षी के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इस पौधे की कहानी वहां की पारिस्थितिकी और जैव विविधता को एक अलग नजरिए से समझाती है। हप्लोथिस्मिया का पुनः मिलना जंगल के जीवन में छिपी अनदेखी चीजों को उजागर करता है।

पौधे की खोज और महत्व

हप्लोथिस्मिया एक्सानुलाटा को पहली बार 1851 में परम्बिकुलम क्षेत्र से संकलित किया गया था, लेकिन बाद में इसे खोजे जाने का कोई सबूत नहीं मिला। 1990 के दशक में इस पौधे को विलुप्त घोषित कर दिया गया था। हालांकि, 26 साल पहले वनवासियों और वनस्पतिशास्त्रियों ने इसे पुनः खोज निकाला। इस खोज को वनस्पति वैज्ञानिक एन. ससिधरन और पी. सुजानपाल ने वर्ष 2000 में प्रकाशित शोध पत्र में दर्ज किया।

यह पौधा छोटा, पतला और हल्के क्रीम रंग का होता है, जो छायादार और ह्यूमस युक्त मिट्टी में चलने वाली आद्रता क्षेत्र में उगता है। यह खासतौर पर मानसून के दौरान विकसित होता है और अक्टूबर के महीने में फूल तथा फल देता है। परम्बिकुलम टाइगर रिजर्व में इसे एक दुर्लभ प्रजाति के रूप में गिना जाता है, जो वहां की जैव विविधता का प्रतीक है।

इस पौधे की पुनः खोज ने वन्यजीवन संरक्षण को एक नई दिशा दी है, जहाँ केवल बड़े और आकर्षक जानवरों पर नहीं बल्कि छोटे और कम ज्ञात जीवों पर भी ध्यान दिया जाता है। परम्बिकुलम टाइगर रिजर्व के उप निदेशक नितीश कुमार के अनुसार, यह प्रदर्शनी पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व को दर्शाती है, जहां हर जीव का अपना एक अनूठा योगदान होता है।

परम्बिकुलम रेंज के फॉरेस्ट ऑफिसर जियो बेसिल पॉल ने कहा कि पौधे की खास कहानी ने इस प्रदर्शनी के नाम का आधार बनाया है। उन्होंने बताया कि परम्बिकुलम में यदि बाघ-हाथी जैसे बड़े जीवों की चर्चा होती है, तो साथ ही वनस्पति, कवक, कीट तथा कई छोटे जीवों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

तस्वीरों में परम्बिकुलम के वन्यजीवन और प्राकृतिक दृश्यों को दिखाते हुए, प्रदर्शनी आगंतुकों को जंगल के उन जीवों से भी परिचित कराती है जिनके प्रति उनकी समझ कम होती है। हप्लोथिस्मिया की कहानी इस बात की याद दिलाती है कि जंगल में अभी भी ऐसे जीव हैं जो लुप्त हो सकते हैं और फिर से हमें कुछ नया सिखा सकते हैं।

इस वन्यजीव सप्ताह पर प्रदर्शनी ने पर्यटकों से अनुरोध किया है कि वे जंगल को और करीब से देखें और उसके हर जीव की अहमियत को समझें। यह पौधा एक चुपचाप मौजूद असाधारण जीवन का प्रतीक बन चुका है, जो प्रकृति की अद्भुत कायमियत का परिचायक है।

Source

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button