पंजाब के मंसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या

पंजाब के मंसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। 13 अक्टूबर को हुई इस घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में सड़क पर उतर आए हैं। झोटा के आदर्शों को आगे बढ़ाने की अपील करते हुए स्थानीय लोग टिकोनी इलाके की सड़क को लगातार प्रदर्शन स्थल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
नशा विरोधी संघर्ष में बढ़ता दबाव
परविंदर सिंह झोटा, जो नशा मुक्ति के लिए काम कर रहे थे, 40 वर्ष के थे। मंसा शहर के टिकोनी इलाके में यह हमला हुआ था। इस हत्या की घटना के दो सप्ताह बाद भी उनकी अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों द्वारा स्थापित किए गए बड़े होर्डिंग्स पर झोटा को शहीद बताया गया है और उन्हें याद करने के बजाय उनके आदर्शों की रक्षा करने का आह्वान किया गया है। पंजाब पिछले दो दशकों से नशे से लड़ाई लड़ रहा है, और यह हत्याकांड उस संघर्ष को नया महत्व देता है।
स्थानीय लोगों का प्रदर्शन जारी
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद टिकोनी इलाके में लोगों का एक स्थायी कब्जा बन गया है, जो उनके खिलाफ नशे के मुद्दे पर जागरूकता बढ़ा रहा है। बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और पुरुष सभी यहां रोजाना आते हैं और प्रदर्शन स्थल पर अपनी मौजूदगी बनाए रखते हैं।
पुलिस ने यातायात को नियंत्रित करने के लिए कई रास्तों को बाधित कर रखा है, लेकिन इससे स्थानीय लोगों के प्रदर्शन की प्रतिबद्धता में कोई कमी नहीं आई है। वे लगातार अपने आंदोलन को जारी रखने की इच्छा जता रहे हैं।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि स्थानीय पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। यह घटना पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान में एक बड़ा झटका मानी जा रही है।
स्थानीय नेतृत्व और सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के कार्यों को याद करते हुए आगे भी नशा मुक्त पंजाब की लड़ाई में बड़ा योगदान देने का संदेश दे रहे हैं।
यह मामला पंजाब में नशे की समस्या के खिलाफ जारी संघर्ष की गंभीर स्थिति को दर्शाता है और यह भी बताता है कि इस क्षेत्र में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने की आवश्यकता है।




