देखें 5 संकेत जब आपका गद्दा अधिक नहीं देता सही सपोर्ट

क्या आपने पिछले कई वर्षों से वही गद्दा इस्तेमाल कर रहे हैं? अगर हां तो यह जानना जरूरी है कि कब आपको गद्दा बदलने का समय आ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, हर 7 से 10 वर्षों में गद्दे को बदलना चाहिए ताकि अच्छी नींद सुनिश्चित हो सके और शरीर को सही आराम मिले।
गद्दे में ख़राबी के प्रमुख संकेत
Peps Industries के प्रबंध निदेशक G Shankar Ramm के मुताबिक, सुबह जल्दी कंधों या पीठ में अकड़न होना एक बड़ा संकेत है कि गद्दा आपकी रीढ़ की कड़ी सपोर्ट नहीं कर रहा। ऐसा गद्दा शरीर की प्राकृतिक बनावट को सहारा नहीं दे पाता और आराम में बाधा डालता है।
गद्दे पर कोई गहरा डिप या स्थायी शरीर का निशान देखना भी खराब होने का संकेत है। इतना गहरा धंसा होना सामान्य नहीं है और इसे गद्दे को घुमाने से ठीक नहीं किया जा सकता।
आपकी सेहत पर गद्दे का असर
रद्दी गद्दों में धीरे-धीरे डस्ट माइट्स, मृत त्वचा और नमी जमा हो जाती है जो एलर्जी का कारण बन सकती हैं। खासकर रात को नाक बंद हो जाना या छींक आना इस समस्या की पहचान हो सकती है। ऐसे गद्दे अस्थमा या राइनाइटिस के मरीजों के लिए खतरा बढ़ाते हैं।
इसके अलावा, अगर गद्दा हिले तो आवाज करता है या आपके साथी की हर हरकत आपको महसूस होती है तो यह भी खराबी का चिन्ह है। इसके पीछे स्प्रिंग्स की थकावट और धातु में कमजोरी हो सकती है।
अगर आप होटल या किसी रिश्तेदार के घर आराम से सोते हैं, लेकिन अपने गद्दे पर सोते समय कम आराम महसूस करते हैं, तो घर का गद्दा ही समस्या का मुख्य कारण हो सकता है।
शरीर को आराम देने के लिए सही गद्दा जरूरी है, जो आपकी शरीर के अनुसार रीढ़ को सही स्थिति में रखे। बहुत सख्त या महंगा गद्दा ही सबसे अच्छा नहीं होता।
विशेष रूप से भारत जैसे गर्म और आर्द्र माहौल में सांस लेने वाले मटेरियल वाले गद्दे अधिक उपयुक्त होते हैं क्योंकि वे नमी को कम करते हैं। गद्दा खरीदते समय कुछ रातों की ट्रायल पीरियड का होना उपयोगी होता है।
अच्छे गद्दे को एक लग्जरी नहीं बल्कि सेहत के लिए जरूरी वस्तु के रूप में देखना चाहिए क्योंकि यह आपकी ऊर्जा, ध्यान और मूड को बेहतर बनाने में मदद करता है। अगर गद्दा सात साल से पुराना है और सुबह ताज़गी की जगह थकावट महसूस होते है, तो बदलाव की जरूरत है।




