साधगुरु ने दीवाली 2026 पर कहा दीपक जलाना अकेला अंधकार दूर नहीं करता

साधगुरु ने दीवाली 2026 को लेकर एक गहरा संदेश देते हुए बताया कि दीपक जलाना केवल बाहरी अंधकार को दूर करता है, पर असली अंधकार हमारे अंदर होता है जिसे समझना और दूर करना जरूरी है। यह बात उन्होंने 3 नवंबर 2026 को ईशा फाउंडेशन की ओर से जारी लेख में कही।
दीपावली के वास्तविक अर्थ क्या हैं?
साधगुरु के अनुसार, दीवाली केवल दीपों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह स्पष्टता का उत्सव है। प्रकाश का मतलब सिर्फ भौतिक रोशनी नहीं बल्कि जीवन में नयी शुरुआत और साफ समझदारी से है। उन्होंने कहा, “दीपावली इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अंदर के अंधकार को दूर करने का महोत्सव है।”
इस संदेश के साथ वे हमें अपने भीतर झांकने और अपनी सोच, चुनावों व कार्यों का विश्लेषण करने के लिए प्रेरित करते हैं। यानी दिवाली के अवसर पर केवल घर सजाने के बजाय खुद में बदलाव लाना चाहिए।
अंतरात्मा के अंधकार को कैसे दूर करें?
साधगुरु ने बताया कि क्रोध, ईर्ष्या, घृणा और भय जैसी भावनाएं हमारे अंदर पीड़ा उत्पन्न करती हैं। इन भावनाओं को वे नरकासुर की कथा से जोड़ते हैं, जो भगवान कृष्ण की विजय की कहानी में आती है।
यह त्योहार नकारात्मकता को परास्त करने का संदेश भी देता है। वह कहते हैं कि हमें अनावश्यक द्वेष से मुक्त होकर अपने प्रतिक्रियाओं पर ध्यान देना चाहिए। इसका मतलब यह नहीं कि मुश्किल भावनाओं को नजरअंदाज किया जाए बल्कि उन्हें समझ कर सही प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
आत्म-अवलोकन से हम अपनी जिंदगी में अधिक जागरूकता ला सकते हैं, जो खुशी की ओर पहला कदम है।
प्रकाश को अंदर की स्पष्टता से क्यों जोड़ते हैं?
साधगुरु का कहना है कि बाहर दीयों का प्रकाश हमारे भीतर जागरूकता लाने की याद दिलाता है। केवल आत्म-विश्वास से चीजें सही नहीं होतीं, जब तक उसमें स्पष्टता न हो। ज्ञान, क्षमता और महत्त्वाकांक्षा के बावजूद बिना समझ के निर्णय गलत हो सकते हैं।
उन्होंने अक्षमता और मानसिक जड़ता को भी दीवाली की परंपरा में शामिल किया है। दीवाली का अर्थ असक्रियता को छोड़कर उत्साह और भागीदारी से जीवन को जीना भी है।
इस त्यौहार पर साधारण क्रियाओं में ऊर्जा लाना, परिवार के साथ अर्थपूर्ण समय बिताना और जिम्मेदारियों को पूरी संवेदनशीलता से निभाना जरूरी है।
साधगुरु का यह दृष्टिकोण हमें बताता है कि दीपावली का असली उत्सव हमारे मन के भीतर प्रकाश फैलाने का है, न कि केवल दीयों की चमक तक सीमित। यह हमें स्वयं के सुधार और सकारात्मकता की ओर बढ़ने का आमंत्रण देता है।




