बीजेपी ने कहा सुप्रीम कोर्ट की EC और केंद्र को नोटिस से संस्थानों की स्वतंत्रता दिखी

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी करने के फैसले को लोकतंत्र की मजबूत प्रक्रिया बताया है। भाजपा ने विरोधी दलों द्वारा देश में डर का माहौल पैदा करने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया लोकतंत्र की जीवंतता का प्रमाण है।
सुप्रीम कोर्ट का नोटिस लोकतंत्र की संवैधानिक प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने पीआईएल याचिका की सुनवाई करते हुए निर्वाचन आयोग द्वारा बिना दो चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के लिए गए निर्णयों को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा है। यह नोटिस एक सप्ताह के अंदर मिलने वाले जवाबों के आधार पर कार्रवाई की संभावना जताता है। भाजपा के प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जाना और नोटिस जारी होना लोकतंत्र की न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
पात्रा ने बताया कि चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आसपास उठी विवादों और अन्य दो चुनाव आयुक्तों द्वारा साझा विरोधी नोटों को लोकतंत्र की स्वस्थ आदत बताया। उन्होंने कहा कि मतभेदों को लेकर संवाद और बहस लोकतंत्र की पहचान है तथा इसी के बाद किसी फैसले पर सहमति बनती है।
भाजपा का विपक्ष पर कटाक्ष और पंजाब की कानून व्यवस्था
भाजपा के अनुसार, चुनाव आयोग में मतभेदों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचना और वहां से नोटिस मिलना, आज के समय में लोकतंत्र की स्वतंत्र कार्यप्रणाली का अनुकूल उदाहरण है। पात्रा ने विश्वास जताया कि अब जो देश में तानाशाही और डर का माहौल होने के आरोप लगाते हैं, वे दो बार सोचेंगे।
उन्होंने कहा कि देश में कहीं भी डर का माहौल नहीं है, बल्कि लोकतंत्र का माहौल है। सभी संस्थान संविधान के तहत स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं।
पात्रा ने पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश का समर्थन किया जिसमें मुख्य मंत्री भगवंत मान के विशेष अधिकारी और उनके सहयोगियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए सीबीआई जांच का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने उल्लेख किया कि पंजाब में कानून व्यवस्था बिगड़ी हुई है और पिछले 48 घंटे में चार हत्याएं हुई हैं। इसके अलावा एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जो मेकअप आर्टिस्ट भी थे, की भी हत्या हुई। पात्रा ने सवाल उठाया कि जब पुलिसकर्मी ही निशाना बन रहे हों तो आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे हो सकती है।
इस तरह भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लोकतंत्र की कार्यवाही बताते हुए यह साफ किया कि देश में संस्थानों की स्वतंत्रता बनी हुई है और विपक्ष के डर का माहौल बनाने वाले बयान निराधार हैं। सरकार और निकाय संवैधानिक दायरे में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।




