तनाव हमेशा बुरा नहीं होता: जानिए क्यों तनाव लाभकारी हो सकता है

तनाव शब्द को सामान्यत: नकारात्मक माना जाता है, लेकिन इसका हर रूप हानिकारक नहीं होता है। मनोविज्ञानी डेविड यीगर ने अपनी पुस्तक 10 to 25 में बताया है कि तनाव जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसे पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं। जरूरी यह है कि हम तनाव के विभिन्न प्रकारों को समझें और हल्के तनाव के साथ बेहतर तरीके से निपटना सीखें।
तनाव का महत्व और स्वास्थ्य संबंधी लाभ
मनोवैज्ञानिक मिरेला हबिबोविक के अनुसार, तनाव का एक ऐसा स्तर होता है जिसे प्राप्त करना जरूरी होता है ताकि हम चुनौतियों का सामना कर सकें। उनका कहना है कि तनाव शरीर की एक प्रणाली है जो खतरों की चेतावनी देने के काम आती है और हमारा जीवन रक्षा करती है। उदाहरण के लिए, सड़क पार करते वक्त अचानक आने वाली कार से बचने के लिए शरीर में तेजी से प्रतिक्रिया होती है जो हमें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाती है।
हल्का मानसिक तनाव जैसे कि परीक्षा में बैठना, मस्तिष्क को सक्रिय कर फोकस बढ़ाने में मदद करता है। इस सकारात्मक तनाव को ही ‘यूस्ट्रेस’ कहा जाता है, जो स्वास्थ्यवर्धक होता है। इसके विपरीत, यदि हम हर तनाव को हानिकारक मानने लगें तो हम ऐसी स्थितियों से बच सकते हैं जो हमारे विकास में मदद करती हैं।
तनाव से जुड़ी गलतफहमियां और संतुलन की जरूरत
पिछले समय में मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप सामान्य नकारात्मक भावनाओं को भी रोग समझ लिया गया है। मनोवैज्ञानिक लूसी फॉल्क्स ने बताया कि बहुत से लोग हर प्रकार के तनाव को विषाक्त मानते हैं और यूस्ट्रेस तथा डिस्टेस्ट के बीच अंतर नहीं समझ पाते।
हबिबोविक के अनुसार, समस्या तब शुरू होती है जब तनाव प्रणाली बार-बार और बिना वजह सक्रिय हो जाती है। नींद की कमी, मित्रों से विवाद, नापसंद विषय का अध्ययन, बॉस द्वारा इग्नोर किया जाना या नकारात्मक सोच तनाव बढ़ाती है। साथ ही, अगर कोई व्यक्ति अत्यंत नीरस या उबाऊ काम में लगे तो भी तनाव उत्पन्न होता है। अत: ज्यादा और कम दोनों ही तरह के उत्तेजना तनाव का कारण बनते हैं।
तनाव तब हानिकारक हो जाता है जब यह लंबे समय तक बना रहता है और व्यक्ति को आराम या पुनःस्फूर्ति का मौका नहीं मिलता। ऐसे परिस्थितियों में बर्नआउट या बोअर-आउट हो सकता है, जो तनाव के दो अत्यधिक रूप हैं। यदि व्यक्ति को अपनी क्षमताओं के अनुसार काम मिले और वह उन्हें कर सकें, तो वे आराम क्षेत्र में होते हैं, लेकिन जब चुनौती थोड़ी बढ़ जाती है तो तनाव का स्तर सबसे उपयुक्त होता है और इससे ऊर्जा तथा रचनात्मकता बढ़ती है।
अधिक जटिल और बोझिल कार्यों का दबाव बर्नआउट की स्थिति तक ले जाता है। हबिबोविक मानती हैं कि कभी-कभी तनाव के दोनों चरम पर होना ठीक है, किंतु अधिक समय तक मध्यम तनाव के स्तर पर कार्य करना फायदेमंद रहता है। फॉल्क्स भी मानती हैं कि हमें खतरनाक और अत्याधुनिक तनाव से बचाव करना चाहिए, लेकिन तनाव से पूरी तरह बचना भी सही नहीं है।
इस प्रकार सही संतुलन बनाकर तनाव को समझना आवश्यक है, जिससे हम अपनी पूर्ण क्षमता का विकास कर सकते हैं और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बना सकते हैं। तनाव को तभी हानिकारक मानना चाहिए जब वह लंबे समय तक ठीक से प्रबंधित न हो।




