विशाखापत्तनम में राजाका समुदाय ने अनुसूचित जाति दर्जे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया

विशाखापत्तनम में सोमवार को राजाका समुदाय के सदस्यों ने गांधी प्रतिमा के पास प्रदर्शन किया। उनका मुख्य आग्रह था कि उन्हें अनुसूचित जाति (SC) की सूची में शामिल किया जाए। यह प्रदर्शन ग्रेटर विशाखापत्तनम म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन कार्यालय के समीप आयोजित हुआ।
आंदोलन के प्रमुख मांग और पृष्ठभूमि
आंध्र प्रदेश राजाका SC साधना कोर कमेटी के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा करने की मांग की। कमेटी ने बताया कि राजाका समुदाय 18 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में SC सूची में शामिल है, लेकिन आंध्र प्रदेश में उन्हें अभी तक वह दर्जा नहीं मिला है।
प्रदर्शनकारियों की मांगों में SC में शामिल करने के लिए विशेष कमीशन बनाने, 50 वर्ष की आयु में पेंशन देने और तब तक सुरक्षा कानून लागू करने की अहम मांगें शामिल थीं। इसके साथ ही उन्होंने 250 यूनिट तक बिजली मुफ्त देने, उनके पारंपरिक पेशे के लिए टैंक पर स्वामित्व का अधिकार देने का भी आग्रह किया।
अन्य मांगें और आगे की योजना
कोर कमेटी ने राजाका महासंघ के लिए वार्षिक बजट में ₹250 करोड़ आवंटित करने, जो सब्सिडी वाले ऋण उपलब्ध करा सके, भी आग्रह किया। साथ ही ₹50 करोड़ नए धोबी घाट बनाने, उनकी मरम्मत और संरक्षण के लिए मांगे गए। अस्पतालों और पुलिस विभाग में धोबी पद स्थापित करने तथा बेरोजगार युवाओं को ₹10 लाख तक सब्सिडी वाले ऋण देने की भी मांग रखी गई।
कोर कमेटी के सदस्य के. सत्यनारायण ने बताया कि लगभग 500 प्रदर्शनकारी विशाखापत्तनम जिले सहित राज्य के कई हिस्सों से शामिल हुए हैं। आंध्र प्रदेश के विभिन्न जिलों से कोर कमेटी के नेता प्रदर्शन के लिए एकजुट हुए हैं। उन्होंने कहा, “हम पिछले कई दशकों से अपने अधिकारों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। हर चुनाव से पहले वादे तो होते हैं, लेकिन पूरा नहीं किया जाता।”
सत्यनारायण ने आगे बताया कि यह आंदोलन मई से शुरू हुआ है और अब तक उन्होंने राज्य में कई दौर की बैठकें आयोजित की हैं। इनमें इलुरु, डचेपल्ली, चित्तूर, अनकापल्ली, राजामहेंद्रवरम और मदनपल्ली शामिल हैं। उन्होंने कहा कि agitation अन्य जिलों में भी जारी रखेंगे।
यह आंदोलन आंध्र प्रदेश के राजाका समुदाय के लिए न्याय और सामाजिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के समक्ष उनकी मांगों का दबाव बढ़ने की उम्मीद है।
राजाका समुदाय की यह मांग न केवल आर्थिक मान्यता की ओर है, बल्कि सामाजिक सम्मान और सुरक्षा की भी मांग है जो अनुसूचित जाति के दर्जे से जुड़ी हुई है। इस आंदोलन की अगली छलांग क्या होगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
वर्तमान समय में समाज के विभिन्न तबकों की समानता और अधिकारों के लिए किये जा रहे प्रयासों में इस प्रदर्शन का अपना महत्व है, जो कि आंध्र प्रदेश के राजाका समुदाय के लिए उल्लेखनीय माना जा रहा है।




