तमिलनाडु में उत्तर-पूर्व मानसून ने पकड़ी रफ्तार, चेन्नई में तेज बारिश

तमिलनाडु में उत्तर-पूर्व मानसून ने जोर पकड़ लिया है और राज्य के विशेषकर उत्तरी तटीय जिलों में भारी बारिश हो रही है। इस मानसूनी गतिविधि के कारण 21 अक्टूबर की सुबह तक चेन्नई और आसपास के इलाकों में तेज बारिश दर्ज की गई।
भारी बारिश और मौसम की स्थिति
राज्य में भारी बारिश की यह स्थिति 26 अक्टूबर तक जारी रहने की संभावना है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी में 21 अक्टूबर को सुबह के समय एक न्यून दबाव क्षेत्र बनने जा रहा है। मौजूदा निचले दबाव वाले क्षेत्र से एक ट्राफ बंगाल की खाड़ी के केंद्र से तमिलनाडु तट और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश तक फैला हुआ है, जिसकी तीव्रता पर नजर रखी जा रही है।
चेन्नई में कई इलाकों में रात भर तेज बारिश हुई है। MGR नगर में 24 घंटे के भीतर अधिकतम 15 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जो इस अवधि का सबसे अधिक आंकड़ा है। अन्य इलाकों जैसे वडापुरानी, सेदापेट, मीनमक्कम और अलंदर आदि में भी 10-14 सेमी के बीच बारिश दर्ज हुई।
तमिलनाडु के अन्य जिलों में बारिश का हाल
राज्य के कई अन्य जिलों जैसे कन्नियाकुमारी, कांचीपुरम, तिरुप्पुर, रामनाथपुरम, तेनकासी और विरुधुनगर में भी मध्यम से भारी बारिश हुई है। बारिश करने वाले बादल तमिलनाडु के कई हिस्सों में सक्रिय बने हुए हैं जो राज्य में बरसात को निरंतर बनाए रखेंगे।
चेन्नई के अलावा दक्षिणी तटीय जिलों जैसे तूतुकुड़ी, तिरुनेलveli और कन्नियाकुमारी में आने वाले दिन भी भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। इसके साथ ही क्यारूर, डिंडीगल, पुदुकोट्टई और थंजावुर जैसे आंतरिक और डेल्टा इलाके भी तेज बारिश देख सकते हैं।
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (RMC), चेन्नई के अनुसार, अरब सागर के दक्षिण-पश्चिम में एक कम दबाव का क्षेत्र सोमालिया तट की ओर बढ़ रहा है, लेकिन यह तमिलनाडु पर ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पाएगा। इसके अतिरिक्त बंगाल की खाड़ी में 23 अक्टूबर के आस-पास एक और कम दबाव वाला क्षेत्र बनने का अनुमान है, जिसे RMC बड़ी नजर से देख रहा है।
इस मौसम प्रणाली की ताकत और गति के आधार पर अगले कुछ दिनों में तमिलनाडु पर और बारिश हो सकती है। फिलहाल इस प्रणाली का मुख्य प्रभाव थाईलैंड और म्यांमार के ऊपर के क्षेत्र में है, जो तमिलनाडु से दूर है।
इस मौसम की चक्की के चलते राज्य के दक्षिणी और डेल्टा क्षेत्र में सोमवार तक भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। सतत मानसूनी गतिविधि के कारण फसल, जल संसाधन और जनजीवन पर इसका सीधा असर रहेगा। इसलिए संबंधित विभाग अलर्ट और सतर्कता बनाए हुए हैं।




