
सब तक एक्सप्रेस।
लखनऊ। भाकपा (माले) लिबरेशन, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (एआईएफबी) ने मंगलवार को नेताओं की कथित अवैध गिरफ्तारी और उत्पीड़न के विरोध में जिला कलेक्ट्रेट तक संयुक्त मार्च निकाला। मार्च के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया।
यह विरोध मार्च भाकपा (माले) लिबरेशन के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव कामरेड सुधाकर यादव और मिर्जापुर जिला सचिव कामरेड जीरा भारती की गिरफ्तारी, फर्जी मुकदमों में फंसाए जाने और उत्पीड़न के खिलाफ आयोजित किया गया। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि 3 जनवरी 2026 को दोनों नेताओं को मिर्जापुर के अदलहाट थाना क्षेत्र से उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वे बनारस में एक दिवंगत पार्टी सदस्य की अंत्येष्टि में शामिल होकर लौट रहे थे। पुलिस द्वारा न तो गिरफ्तारी का कारण बताया गया और न ही कोई वारंट दिखाया गया। लगभग 24 घंटे बाद यह जानकारी दी गई कि दोनों को मिर्जापुर जिला जेल भेज दिया गया है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई मिर्जापुर जिले में आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन के अधिकारों की लड़ाई से जुड़ी हुई है। लालगंज तहसील के तेंदुआ खुर्द गांव में चार पीढ़ियों से रह रहे आदिवासी परिवारों को वन विभाग द्वारा बेदखल किए जाने के प्रयास का विरोध किया जा रहा था। इसी क्रम में 2 जनवरी को हुए प्रदर्शन के बाद देर रात भारी पुलिस बल और जेसीबी मशीनों के साथ कार्रवाई की गई, जिसमें महिलाओं के साथ अभद्रता और मारपीट का आरोप लगाया गया।
वाम दलों का कहना है कि एफआईआर संख्या 04/2026 में कामरेड सुधाकर यादव का नाम दर्ज नहीं है और वे घटनास्थल पर मौजूद भी नहीं थे, इसके बावजूद उन्हें गंभीर धाराओं में जेल भेज दिया गया। इसी तरह कामरेड जीरा भारती भी मौके पर मौजूद नहीं थीं, फिर भी उन्हें झूठे तरीके से नामजद किया गया। आरोप यह भी है कि गिरफ्तारी एफआईआर दर्ज होने से पहले की गई।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) लखनऊ जिला इंचार्ज कामरेड रमेश सिंह सेंगर ने कहा कि यह कार्रवाई आदिवासियों के समर्थन में खड़े नेताओं की आवाज दबाने का प्रयास है। वहीं सीपीआई की राज्य कमेटी सदस्य कामरेड कांति मिश्रा ने इसे लोकतांत्रिक आंदोलनों का दमन बताया। ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक की कामरेड आरती भारती ने महिला नेता के साथ कथित उत्पीड़न को महिला गरिमा और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
मार्च में आइसा, जन संस्कृति मंच, ऐपवा सहित विभिन्न वाम संगठनों के नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए।
ज्ञापन में मांग की गई कि कामरेड सुधाकर यादव, कामरेड जीरा भारती और सभी गिरफ्तार ग्रामीणों को तत्काल रिहा किया जाए, एफआईआर रद्द की जाए, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो, महिलाओं पर हुई हिंसा की जांच कर एफआईआर दर्ज की जाए तथा वनाधिकार कानून के तहत आदिवासियों के अधिकार सुनिश्चित किए जाएं।
वाम दलों ने चेतावनी दी कि यदि न्याय नहीं मिला तो राज्यव्यापी आंदोलन और तेज किया जाएगा।



