नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों ने हथियार डाले, 36 इनामी नक्सलियों का सरेंडर।

सरकार की रणनीति पर केंद्रित
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक मोड़
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 63 माओवादियों का आत्मसमर्पण राज्य सरकार की सशक्त रणनीति और केंद्र के सहयोग का परिणाम माना जा रहा है। यह घटना नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक निर्णायक मोड़ है।
इनाम और नेतृत्व दोनों कमजोर
इन 63 माओवादियों में से 36 पर 1.19 करोड़ रुपये का इनाम था, जिससे साफ है कि संगठन का नेतृत्व अब बिखर रहा है। हाल ही में तेलंगाना में बारसे देवा का समर्पण और सुकमा में 26 इनामी नक्सलियों का सरेंडर इसका प्रमाण है।
सुरक्षा बलों की सख्ती
सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई, खुफिया नेटवर्क और क्षेत्रीय दबाव के कारण माओवादी अब जंगलों में सुरक्षित नहीं हैं। 2025 में 500 से अधिक माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए।
विकास बनाम हिंसा
सरकार का मानना है कि विकास योजनाएं, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं माओवादियों की विचारधारा को कमजोर कर रही हैं, जिससे युवा हिंसा छोड़कर समाज से जुड़ रहे हैं।
2026 तक नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़
मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य अब केवल घोषणा नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत बनता दिख रहा है।



