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उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर सरकार असमंजस में है। अब तक ये चुनाव अप्रैल–मई 2026 में होने थे, लेकिन मौजूदा हालात देखते हुए इनके कम से कम चार से छह महीने टलने की संभावना जताई जा रही है।
सबसे बड़ी वजह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण तय न हो पाना है। सुप्रीम कोर्ट के “ट्रिपल टेस्ट” के अनुसार, बिना समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के ओबीसी आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता। फिलहाल राज्य में ऐसा कोई आयोग गठित नहीं हुआ है।
पंचायती राज विभाग ने आयोग के गठन के लिए छह सदस्यों के नाम शासन को भेज दिए हैं, जिस पर कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही आयोग बनेगा। आयोग बनने के बाद 75 जिलों में ओबीसी आबादी का सर्वे होगा, जिसमें करीब छह महीने लग सकते हैं। इसके बाद सीटों का निर्धारण और चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें तीन–चार महीने और लगेंगे।
पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने हाल ही में कहा है कि चुनाव समय पर अप्रैल–मई में ही होंगे, लेकिन इतने कम समय में आयोग गठन, सर्वे और आरक्षण तय होना मुश्किल माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि 2011 की जनगणना के आधार पर अनुसूचित जाति (SC) के लिए 20.70% और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 0.57% सीटें आरक्षित होंगी। ओबीसी के लिए 2015 के रैपिड सर्वे में ग्रामीण आबादी में हिस्सेदारी 53.33% बताई गई थी, लेकिन नियम के अनुसार अधिकतम 27% से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
उधर, राज्य निर्वाचन आयोग अपने स्तर पर तैयारी में जुटा है और मतदाता सूची के संशोधन का काम तेज कर दिया गया है।
कुल मिलाकर, ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण पंचायत चुनाव तय समय पर होना मुश्किल माना जा रहा है।
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