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आशा कर्मियों की हड़ताल 26वें दिन भी जारी, मंडलायुक्त कार्यालयों पर प्रदर्शन

सब तक एक्सप्रेस।
लखनऊ। आशा कर्मियों की राज्यव्यापी हड़ताल 26वें दिन भी जारी रही। बुधवार को मंडलायुक्त कार्यालयों पर प्रदर्शन के आह्वान पर रायबरेली, उन्नाव, बाराबंकी, लखीमपुर और हरदोई सहित कई जिलों से बड़ी संख्या में आशा कर्मी लखनऊ के परिवर्तन चौक पर जुटीं। कड़ाके की ठंड के बावजूद प्रदर्शन जारी रहा।
आल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं दिल्ली आशा कर्मचारी संघ की अध्यक्ष श्वेता राज ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशें लागू नहीं कर रही हैं। आशा कर्मियों को कर्मचारी का दर्जा, न्यूनतम वेतन, ईपीएफ, ईएसआई और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी और उप मुख्यमंत्री को अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए।
मंडल अध्यक्ष गीता मिश्रा ने कहा कि आशा कर्मियों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का लंबे समय से भुगतान नहीं हुआ है। करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बकाया बताया गया है। उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ने के बावजूद प्रोत्साहन राशि की दरों में कोई संशोधन नहीं किया गया है।
लखीमपुर की अध्यक्ष राकिया बानो ने कहा कि आशा कर्मियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है और उनके सम्मान को ठेस पहुंचाई जा रही है। उन्नाव की जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा घोषित मानदेय आज तक कर्मियों को नहीं मिला।
बाराबंकी की जिलाध्यक्ष विनोद कुमारी ने स्वास्थ्य केंद्रों में अवैध वसूली के आरोप लगाए और कहा कि बदनामी आशा कर्मियों की होती है, जबकि कार्रवाई किसी पर नहीं होती।
राज्य कमेटी सदस्य अर्चना रावत ने कहा कि सरकार ने पहले वार्ता का भरोसा दिया था, लेकिन अब वादाखिलाफी की गई है।
प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित 14 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें आशा कर्मियों के स्थाईकरण, न्यूनतम वेतन की गारंटी, ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी, मातृत्व अवकाश और पिछले पांच वर्षों की बकाया प्रोत्साहन राशि के भुगतान की मांग शामिल है।
— सब तक एक्सप्रेस

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