
रिपोर्ट: क्षितीश चतुर्वेदी, सब तक एक्सप्रेस, सोनभद्र
सोनभद्र। चतरा ब्लॉक क्षेत्र के चिंतावनपुर-खुज्झा संडी में प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे के विरोध में किसानों और ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में प्रभावित किसान शामिल हुए और अपनी जमीन बचाने की मांग उठाई। किसानों ने कहा कि उनकी उपजाऊ कृषि भूमि उनकी आजीविका का मुख्य आधार है और किसी भी कीमत पर उसे छीने जाने का विरोध किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान गुप्त काशी के नायक एवं पर्यावरण प्रहरी रवि प्रकाश चौबे किसानों के बीच पहुंचे और उनके आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और जिला प्रशासन की नीतियों से किसानों के हित प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना था कि प्रस्तावित परियोजना से किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा, जबकि बड़ी कंपनियों को फायदा होने की आशंका है।
रवि प्रकाश चौबे ने पर्यावरण को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री के “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के माध्यम से पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सोनभद्र में परियोजनाओं के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की बात सामने आ रही है। उन्होंने इसे पर्यावरण की दृष्टि से गंभीर विषय बताया।
किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा ने कहा कि उनका संगठन किसानों के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि जनपद के जल, जंगल, जमीन, आदिवासी समुदायों और किसानों के अधिकारों की लड़ाई अंतिम सांस तक जारी रहेगी। उन्होंने आशंका जताई कि एक्सप्रेसवे और औद्योगिक परियोजनाओं से किसानों की उपजाऊ जमीन प्रभावित होने के साथ पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ सकता है।
किसान विमलेश पटेल ने कहा, “जान दे देंगे, लेकिन अपनी जमीन नहीं देंगे। जमीन हमारे लिए मां के समान है और कोई अपनी मां को नहीं बेचता।”
किसान गुलाब ओझा ने आरोप लगाया कि सरकार और जिला प्रशासन किसानों के हितों की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे का विरोध कर रहे हैं और अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं।
वहीं किसान नीरज पटेल ने कहा कि उपजाऊ कृषि भूमि उनके परिवारों की आजीविका का आधार है। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर कृषि भूमि पर कॉरपोरेट परियोजनाएं और एक्सप्रेसवे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
किसान जनार्दन शुक्ला ने कहा कि किसानों के विरोध के बावजूद परियोजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
चेतन ओझा ने कहा कि औद्योगिक विकास के नाम पर स्थानीय लोगों को मजदूर बनाने की योजना बनाई जा रही है। वहीं सुरेंद्र मौर्य ने कहा कि किसी भी सूरत में प्रस्तावित सड़क नहीं बनने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि सड़क बनानी ही है तो पहले आरपीके रोड का निर्माण कराया जाए।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपनी जमीन, पर्यावरण और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई। कार्यक्रम में सैकड़ों प्रभावित किसान और ग्रामीण मौजूद रहे।



