वन्य प्राणी विशेषज्ञ मंसूर खान बने प्रोजेक्ट एलिफेंट स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य

छत्तीसगढ़ के वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। बिलासपुर निवासी और प्रसिद्ध वन्य प्राणी विशेषज्ञ मंसूर खान को प्रोजेक्ट एलिफेंट की स्टीयरिंग कमेटी का सदस्य बनाया गया है। मंसूर खान हाथी विशेषज्ञ के रूप में देशभर में अपनी पहचान रखते हैं और वे पूर्व में छत्तीसगढ़ राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के सदस्य भी रह चुके हैं। उनकी इस नियुक्ति को न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि मध्य प्रदेश के वन विभाग से जुड़े अधिकारियों और संरक्षण से जुड़े संगठनों ने भी सराहा है। आपको बता दें कि प्रोजेक्ट एलिफेंट की स्टीयरिंग कमेटी देश भर में हाथियों को संरक्षण और संवर्धन को लेकर सुझाव देती है। मानव हाथी द्वंद्व खत्म करने, लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ विभागीय स्तर पर भी सुझाव ये कमेटी देती है
जानिये कौन हैं मंसूर खान
मंसूर खान पिछले कई वर्षों से हाथी, भालू, बाघ, तेंदुआ, सियार सहित अन्य वन्य प्राणियों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने को लेकर जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही वे वनों को अग्नि से बचाने के उपाय, जंगलों में जैव विविधता के संरक्षण और ग्रामीण इलाकों में लोगों को वन्य प्राणियों के प्रति संवेदनशील बनाने जैसे विषयों पर भी लगातार काम कर रहे हैं।
देश भर में देते हैं अपनी सेवाएं
उनकी विशेषज्ञता केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रही है। मध्य प्रदेश के शहडोल, मंडला, अनुपपुर और डिंडोरी वन मंडलों में भी समय-समय पर वन विभाग द्वारा उनसे मार्गदर्शन और सेवाएं ली जाती रही हैं। हाथी कॉरिडोर, हाथी विचरण क्षेत्र, मानव-हाथी संघर्ष और रेस्क्यू से जुड़े मामलों में उनका अनुभव बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
जानिये क्यों है ये नियुक्ति अहम
वन्य प्राणी विशेषज्ञ
यह नियुक्ति कई मायनों में ऐतिहासिक है, क्योंकि मंसूर खान छत्तीसगढ़ से पहले ऐसे व्यक्ति होंगे जो शासकीय सेवक नहीं रहे, फिर भी उन्हें इस उच्च स्तरीय समिति में सदस्य बनाया गया है। इससे पहले छत्तीसगढ़ से एक सेवानिवृत्त अधिकारी को एक बार इस तरह की समिति में सदस्य बनाया गया था, लेकिन किसी गैर-शासकीय विशेषज्ञ को यह अवसर पहली बार मिला है। इससे यह संकेत मिलता है कि अब अनुभव और विशेषज्ञता को पद और सेवा पृष्ठभूमि से ऊपर महत्व दिया जा रहा है।
तीन साल का रहेगा कार्यकाल
प्रोजेक्ट एलिफेंट की स्टीयरिंग कमेटी का कार्यकाल इस संबंध में जारी ऑफिस मेमोरेंडम की तिथि से तीन वर्षों के लिए निर्धारित किया गया है। हालांकि, सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से कमेटी की संरचना और उसके कार्यों में आवश्यकतानुसार बदलाव भी किया जा सकता है। यह कमेटी देशभर में प्रोजेक्ट एलिफेंट के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी और समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश और मार्गदर्शन प्रदान करेगी। आवश्यकता पड़ने पर कमेटी की बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि जमीनी स्तर पर सामने आ रही चुनौतियों पर विचार किया जा सके।
वन्य प्राणी विशेषज्ञ कमेटी में शामिल गैर-सरकारी सदस्यों को भारत सरकार के ग्रेड-1 अधिकारियों के समान यात्रा भत्ता (टीए) और दैनिक भत्ता (डीए) प्रदान किया जाएगा, जिससे वे बिना किसी आर्थिक बाधा के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि मंसूर खान जैसे जमीनी अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ की स्टीयरिंग कमेटी में मौजूदगी से प्रोजेक्ट एलिफेंट को व्यावहारिक और प्रभावी दिशा मिलेगी। इससे न केवल हाथियों के संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि मानव-हाथी संघर्ष को कम करने और वन क्षेत्रों में सतत संरक्षण की रणनीतियों को भी बढ़ावा मिलेगा।



