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लखनऊ। बहुजन समाज वृंदावन योजना लखनऊ ग्रुप द्वारा जगत खेड़ा स्थित कमल वर्मा के आवास पर भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले और प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख का संयुक्त जन्मोत्सव समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर दोनों महान शिक्षिकाओं के चित्र पर पुष्प अर्पित कर सामाजिक कार्यों और महिला शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।
कार्यक्रम में बताया गया कि सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 और फातिमा शेख का जन्म 9 जनवरी 1831 को हुआ था। दोनों ने मिलकर उस दौर में महिला शिक्षा की नींव रखी, जब समाज में लड़कियों को पढ़ाना अपराध जैसा माना जाता था।
ग्रुप के संयोजक एवं पूर्व एसडीएम रामकुमार गौतम ने बताया कि जब सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा फुले पुणे में महिला विद्यालय खोलने के लिए जगह तलाश रहे थे, तब उन्हें कहीं भी मकान नहीं मिला। ऐसे समय में फातिमा शेख ने अपने भाई उस्मान शेख के साथ मिलकर अपना घर स्कूल के लिए उपलब्ध कराया और 1 जनवरी 1848 को पुणे के गंजपेठ मोहल्ले में पहले बालिका विद्यालय की स्थापना हुई।
उन्होंने बताया कि विद्यालय जाते समय सावित्रीबाई फुले को सामाजिक विरोध, कीचड़ और गोबर फेंके जाने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। बाद में और भी स्कूल खोले गए, जिनमें सगुणाबाई और फातिमा शेख ने शिक्षिका के रूप में योगदान दिया।
पूर्व एसडीएम जीत लाल सैनी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने प्लेग महामारी के दौरान पीड़ितों की सेवा करते हुए अपना जीवन तक समर्पित कर दिया और 1897 में उनका निधन हो गया।
कार्यक्रम में राम लगन सिंह यादव, सत्यवीर सिंह यादव, सुधाकर सिंह, डॉ. उमाशंकर, डॉ. देवेंद्र यादव, श्रीनाथ सिंह कुशवाहा, पारस नाथ मौर्य, बच्चन लाल, डॉ. राम शब्द, आर.एस. दिवाकर, वीर बहादुर बौद्ध, हरीश जयंत, अमरनाथ, ओमप्रकाश, कालिका प्रसाद, बौधाचार्य लोचन प्रसाद सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे और दोनों महान विभूतियों के संघर्ष को आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।



