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विराट कोहली का ऐतिहासिक शतक: IND vs NZ, इंदौर में कोहराम

भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज विराट कोहली ने न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे और निर्णायक वनडे मैच में एक ऐसी पारी खेली, जिसने सबका दिल जीत लिया। इंदौर के होलकर स्टेडियम में कोहली ने शानदार शतक बनाया — यह उनके वनडे करियर का 54वां शतक है और कुल मिलाकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 85वां शतक भी। इससे पहले वडोदरा में वह 93 रन बनाकर आउट हुए थे, लेकिन इस बार उन्होंने शतक जरूर पूरा किया।

टीम की मुश्किल शुरुआत और कोहली की मजबूती

भारत को इस मैच में 338 रनों का लक्ष्य मिला। लेकिन शुरुआत बेहद मुश्किल रही।
रोहित शर्मा सिर्फ 11 रन पर आउट हो गए।
• कप्तान शुभमन गिल 23 रन पर रहकर टिक नहीं पाए।
श्रेयस अय्यर मात्र 3 रन ही बना सके।
• पिछले मैच के शतकवीर केएल राहुल बेकार एक ही रन बनाकर चले गए।

इन सभी संघर्षों के बीच, कोहली ने अकेले ही खेल को संभाला और भारत को वापसी का मौका दिया।

कोहली-नीतीश की साझेदारी: मैच का मोड़

जब टीम का स्कोर 4 विकेट के नुकसान पर सिर्फ 71 रन था, तब कोहली और नीतीश कुमार रेड्डी ने 88 रनों की मजबूत साझेदारी की। नीतीश ने शानदार अर्धशतक पूरा किया और पुनः टीम को मजबूती दी। हालांकि, वह आउट हो गए, लेकिन कोहली ने निरंतरता दिखाई।

इसके बाद रविंद्र जडेजा भी कुछ खास नहीं कर सके और 12 रन पर आउट हो गए। लेकिन कोहली ने हर्षित राणा के साथ मिलकर टीम को जीत की राह पर डाला।

शतक की पूरी उपलब्धि

कोहली ने 40वें ओवर की आखिरी गेंद पर अपना शतक पूरा किया। यह शतक किसी भी सामान्य शतक की तरह नहीं था — यह दबाव वाली परिस्थितियों में आया शतक था, जहां टीम संघर्ष कर रही थी और उसे भरोसे की जरूरत थी।

न्यूजीलैंड के खिलाफ बड़ा रिकॉर्ड

इस पारी के साथ कोहली वनडे क्रिकेट में न्यूजीलैंड के खिलाफ सबसे ज्यादा 50+ स्कोर करने वाले बल्लेबाजों में दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। उन्होंने نیوزीलैंड के खिलाफ 36 पारियों में 17 बार 50 या उससे ऊपर का स्कोर किया है।
इस सूची में रिकी पॉन्टिंग पहले हैं, जिन्होंने 50 पारियों में 18 बार 50+ स्कोर किया था। कोहली ने डीन जोन्स को पीछे छोड़ा है, जिन्होंने 27 पारियों में 50+ स्कोर किया था।

दबाव में उत्कृष्टता — कोहली की खासियत

कोहली ने फिर से साबित किया कि वह दूसरी पारी के बादशाह हैं। जब हालत खराब हो, विकेट तेजी से गिर रहे हों, टीम संकट में हो — ऐसे समय पर कोहली झुकते नहीं, बल्कि निखरते हैं। उनकी यह पारी इसी भारतीय मानसिकता का प्रतीक है।

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