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UGC के नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL, संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

नए प्रावधानों से शिक्षा की स्वायत्तता और छात्रों के हितों पर खतरा, नियमों पर रोक की मांग

सब तक एक्सप्रेस।
नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने इन नियमों को संविधान के मूल अधिकारों के खिलाफ बताते हुए रद्द करने की मांग की है।
यह PIL अधिवक्ता रीना एन सिंह, विष्णु शंकर जैन और अनिल मिश्रा द्वारा दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि नए नियम शिक्षा की स्वायत्तता, समान अवसर और अकादमिक स्वतंत्रता को प्रभावित करते हैं। इससे न केवल छात्रों के हितों को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि विश्वविद्यालयों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली भी सीमित हो जाएगी।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि नियुक्ति प्रक्रिया, शैक्षणिक योग्यता, पाठ्यक्रम निर्धारण और प्रशासनिक हस्तक्षेप जैसे मामलों में नए प्रावधानों से देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में भ्रम की स्थिति बन गई है। विशेष रूप से मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तर भारत के ग्रामीण व पिछड़े इलाकों के छात्रों पर इसका नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
PIL में यह भी कहा गया है कि शिक्षा भारतीय संस्कृति में ज्ञान की स्वतंत्र परंपरा से जुड़ी हुई है और अत्यधिक केंद्रीकरण शिक्षा की मूल भावना के विपरीत है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि अंतिम निर्णय तक UGC के नए नियमों पर रोक लगाई जाए।
इस मामले को लेकर शिक्षा जगत और छात्र संगठनों में चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था की दिशा तय कर सकता है।

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