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Owaisi on Himant Biswa Sarma: हिमंत के ‘मियां’ वाले बयान पर सियासी बवाल, देशभर में गरमाई राजनीति

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “असम के मुख्यमंत्री भाजपा के हैं। क्या कोई मुख्यमंत्री ऐसा कह सकता है ‘अगर ऑटो-रिक्शा में कोई ‘मिया’ ड्राइवर है और किराया पाँच रुपये है, तो आप उसे चार रुपये देंगे’? असम में ‘मिया’ उन मुसलमानों को कहते हैं जिन्हें 150-200 साल पहले अंग्रेजों द्वारा खेती और काम करने के लिए यहाँ लाया गया था। वे भारत के नागरिक हैं। वे बंगाली बोलते हैं.मैं भाजपा और भारत के प्रधानमंत्री से पूछना चाहता हूँ: आप विकसित भारत की बात करते हैं। आप कहते हैं कि हम तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेंगे। आप कहते हैं कि हम महाशक्ति बनेंगे। आपको चाँद पर घर बनाना है, लेकिन आप ऑटो के लिए एक रुपया भी नहीं देना चाहते। असम के मुख्यमंत्री, आप कितने छोटे हैं?”

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के ‘मियां’ शब्द को लेकर दिए गए बयान ने देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। बयान सामने आते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि मुख्यमंत्री का यह बयान एक विशेष समुदाय को निशाना बनाता है और समाज में विभाजन को बढ़ावा देता है, जबकि सत्तारूढ़ दल और उनके समर्थकों का कहना है कि बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है और इसका मकसद केवल अवैध घुसपैठ और पहचान से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिलाना था। इस पूरे मामले ने एक बार फिर भाषा, पहचान और राजनीति के संवेदनशील रिश्ते को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने हिमंत बिस्वा सरमा के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए इसे असंवैधानिक और नफरत फैलाने वाला करार दिया है। विपक्ष का कहना है कि इस तरह की शब्दावली का इस्तेमाल एक मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को शोभा नहीं देता और इससे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचता है। कई नेताओं ने मांग की है कि मुख्यमंत्री अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। वहीं, कुछ सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने भी इस बयान को लेकर चिंता जताई है और इसे अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ अपमानजनक बताया है।

दूसरी ओर, भाजपा नेताओं का तर्क है कि ‘मियां’ शब्द का इस्तेमाल असम में लंबे समय से एक सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ में होता रहा है और इसे राजनीतिक रंग देकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री का फोकस राज्य की सुरक्षा, अवैध प्रवासन और जनसांख्यिकीय संतुलन जैसे मुद्दों पर है, न कि किसी समुदाय को ठेस पहुंचाने पर। समर्थकों का दावा है कि विपक्ष इस मुद्दे को जानबूझकर बढ़ा रहा है ताकि असली मुद्दों से ध्यान हटाया जा सके।

सोशल मीडिया पर भी यह मामला ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग दो खेमों में बंटे नजर आ रहे हैं। कुछ लोग बयान को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में बता रहे हैं, तो कुछ इसे जिम्मेदार पद पर बैठे नेता की भाषा की मर्यादा से जोड़कर देख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में असम की राजनीति और राष्ट्रीय स्तर पर भी असर डाल सकता है, क्योंकि ऐसे बयान चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं। फिलहाल, ‘मियां’ बयान पर मचा बवाल थमता नजर नहीं आ रहा और यह बहस अभी और लंबी चलने के संकेत दे रही है।

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