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रासलीला के आठवें दिन हुआ सुदामा चरित्र का मंचन

वरिष्ठ संवाददाता:राम अनुज धर द्विवेदी।

वृंदावन के कलाकारों ने सुदामा चरित्र का किया            मार्मिक मंचन
★ श्री कृष्ण रासलीला में सुदामा चरित्र का मंचन देख         भक्त हुए मंत्रमुग्ध
★ द्वारकाधीश की हुई दिव्य आरती

सोनभद्र। रासलीला समिति रॉबर्ट्सगंज द्वारा नगर के रामलीला मैदान में आयोजित 11 दिवसीय रासलीला के आठवें दिन कलाकारों ने महारास के साथ भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता का नृत्य के माध्यम से बड़ा ही मार्मिक मंचन किया गया।
वृंदावन के कलाकारों द्वारा लीला के अंतर्गत बाल्यकाल में सुदामा जी उज्जैन नगरी स्थित शांति वन गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण के लिए जा रहे थे। रास्ते में उनके पैर में कांटा गड़ गया।
इस पर वे दर्द से चीखने चिल्लाने लगे। उसी रास्ते से होकर भगवान श्रीकृष्ण भी गुरुकुल शिक्षा ग्रहण करने जा रहे थे। सुदामा को मुसीबत में देख उन्होंने उनके पांव से कांटा निकाला और जड़ी बूटी लगाई। इस घटना के बाद दोनों मित्र बन गए। गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण के दौरान सुदामा अपना पाठ भूल गए। गुरु द्वारा पूछे जाने के बाद उन्होंने पाठ नहीं सुनाया।


इस पर गुरु ने उन्हें जंगल जाकर लकड़ी लाने को कहा। मित्र को मुसीबत में देख भगवान भी अपने याद किए पाठ को भूलने का नाटक कर बैठे। इस पर क्रोधित गुरु ने उन्हें भी सुदामा के साथ जंगल से लकड़ी लाने का आदेश दिया। भूख लगने पर खाने के लिए सुदामा को दो मुट्ठी चने दिए। जंगल में कृष्ण लकड़ियां लाने चले गए।
उसी समय सुदामा को भूख लगी और उन्होंने पूरा चना खा लिया। लकड़ी लेकर लौटे कृष्ण ने भूख लगने पर सुदामा से चने मांगे तो सुदामा ने सच सच बता दिया। इस पर भगवान ने उन्हें श्राप दिया कि ‘हक पराया खाय के, यही मिलेगी सीख, हो दरिद्री आज से, दर दर मांगे भीख।’ पढ़ाई पूरी करने के बाद श्रीकृष्ण मथुरा के राजा बन गए और सुदामा भिखारी। फिर एक समय आया कि सुदामा श्रीकृष्ण से मिलने पहुंचे। देने के लिए कुछ नहीं था तो वे अपने साथ कच्चा चावल ले गए। सुदामा को देख श्रीकृष्ण अति प्रसन्न हुए। उन्होंने सुदामा के लाए चावल खाने शुरू किए। एक मुट्ठी खाकर एक तथा दूसरी मुट्ठी चावल खाकर जब उन्होंने सुदामा को दो लोक का मालिक बना दिया।


फिर एक समय आया कि सुदामा श्रीकृष्ण से मिलने पहुंचे। देने के लिए कुछ नहीं था तो वे अपने साथ कच्चा चावल ले गए। सुदामा को देख श्रीकृष्ण अति प्रसन्न हुए। उन्होंने सुदामा के लाए चावल खाने शुरू किए। एक मुट्ठी खाकर एक तथा दूसरी मुट्ठी चावल खाकर जब उन्होंने सुदामा को दो लोक का मालिक बना दिया। जब वे तीसरी मुट्ठी चावल खाने लगे तो वहां खड़ी रुक्मिणी ने उन्हें रोककर कहा कि तीनों लोक सुदामा को दे देंगे तो स्वयं कहां रहेंगे प्रभु। इस पर श्रीकृष्ण ने अपने हाथ रोक लिए और सुदामा को दो लोक का मालिक बना दिया।
आठवें दिन के रासलीला का समापन द्वारकाधीश की दिव्य आरती के साथ हुई।
इस अवसर पर समति के जितेन्द्र सिंह, रामप्रसाद यादव, मनोज सिंह,रामू मिश्र,सत्येंद्र पांडेय,धर्मेश सिंह खरवार, सचिन गुप्ता, धीरज जालान,अशोक श्रीवास्तव,विजय कानोड़िया,संतोष सिंह चंदेल,
कमला कांत पांडेय,मिठाई लाल सोनी,शीतल सोनी,गिरीश पांडेय, ब्रजेश शुक्ला सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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