अंतरराष्ट्रीय

रान-इजरायल युद्ध का नया असर: खाड़ी में GPS जाम, जहाज और विमान की लोकेशन गड़बड़

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब समुद्री और हवाई यातायात पर भी दिखने लगा है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में जीपीएस सिग्नल में भारी बाधा देखी गई है।

इस वजह से सैकड़ों जहाजों की लोकेशन गलत दिखाई देने लगी और कई जहाजों को अपनी यात्रा रोकनी पड़ी।


1100 से ज्यादा जहाज प्रभावित

शिपिंग इंटेलिजेंस फर्म विंडवर्ड के अनुसार, हमलों के 24 घंटे के भीतर ही 1,100 से ज्यादा कॉमर्शियल जहाजों के जीपीएस सिस्टम प्रभावित हुए।

यह घटनाएं खास तौर पर यूएई, कतर, ओमान और ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में सामने आईं।


होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है।

जब यहां जीपीएस सिग्नल बाधित हुए तो जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई।


बढ़ती स्पूफिंग की घटनाएं

लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के अनुसार 655 जहाजों पर 1,735 जीपीएस स्पूफिंग की घटनाएं दर्ज की गईं।

इसका मतलब है कि जहाजों को नकली सिग्नल भेजकर उनकी लोकेशन बदल दी गई।


क्यों किया जाता है जीपीएस जैमिंग

विशेषज्ञ बताते हैं कि युद्ध के दौरान जीपीएस जैमिंग का इस्तेमाल दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को भ्रमित करने के लिए किया जाता है।

लेकिन इसका असर नागरिक जहाजों और विमानों पर भी पड़ता है।


विमानों के लिए भी खतरा

अंतरराष्ट्रीय एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अनुसार 2021 से 2024 के बीच विमानों में जीपीएस सिग्नल लॉस की घटनाएं 220 प्रतिशत बढ़ गई हैं।


इलेक्ट्रॉनिक फॉग की स्थिति

नेविगेशन विशेषज्ञ रामसे फराघर ने इसे “इलेक्ट्रॉनिक फॉग” कहा है।

इसका मतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल इतने भ्रमित हो जाते हैं कि वास्तविक स्थिति समझना मुश्किल हो जाता है।


वैश्विक व्यापार पर असर

खाड़ी क्षेत्र में अगर यह समस्या लंबे समय तक जारी रहती है तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर भी पड़ सकता है।

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