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RBI Rule: फ्रॉड होने पर अब RBI देगा पैसा! खाते से उड़े पैसे वापस पाने के लिए 5 दिन के अंदर करें ये जरूरी काम

भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल लेनदेन धोखाधड़ी से ग्राहकों की सुरक्षा के लिए नए नियमों का मसौदा जारी किया है। ये नियम छोटे फ्रॉड के लिए मुआवजे का प्रावधान करते हैं और बैंकों को धोखाधड़ी साबित करने की जिम्मेदारी देते हैं। ₹50,000 तक के नुकसान पर मुआवजा मिलेगा।

HighLights

  1. बैंकों पर होगी धोखाधड़ी साबित करने की जिम्मेदारी।
  2. छोटे फ्रॉड पर ₹25,000 तक का मुआवजा।
  3. 5 दिन में फ्रॉड की सूचना देना अनिवार्य।

 डिजिटल ट्रांजेक्शन के बढ़ते दौर में साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने वाले ग्राहकों के लिए राहत की बड़ी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल लेनदेन में ग्राहकों की जवाबदेही से जुड़े नियमों में संशोधन का एक ड्राफ्ट (प्रारूप) जारी किया है। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को व्यापक सुरक्षा प्रदान करना और छोटे मूल्य के फ्रॉड के लिए मुआवजे की व्यवस्था करना है।

RBI ने इस ड्राफ्ट पर 6 अप्रैल, 2026 तक जनता से सुझाव मांगे हैं। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो ये नए नियम 1 जुलाई, 2026 से लागू हो जाएंगे।

बैंकों पर होगा जिम्मेदारी का बोझ

प्रस्तावित नियमों के तहत, RBI ने ‘अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन’ की परिभाषा को बड़ा कर दिया है। अब इसमें जबरदस्ती (Coercion) या धोखाधड़ी के तहत किए गए भुगतान भी शामिल होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में अब सबूत जुटाने की जिम्मेदारी बैंक की होगी। बैंक को यह साबित करना होगा कि गलती ग्राहक की थी, न कि सिस्टम की।

इन स्थितियों में ग्राहक की ‘जीरो लायबिलिटी’

  • बैंक की लापरवाही: यदि धोखाधड़ी बैंक की किसी कमी या लापरवाही के कारण होती है।
  • थर्ड-पार्टी ब्रीच: यदि किसी तीसरे पक्ष की चूक के कारण फ्रॉड होता है और ग्राहक इसकी सूचना 5 दिनों के भीतर बैंक को दे देता है।

अलर्ट और रिपोर्टिंग के लिए सख्त नियम

ग्राहकों को सतर्क रखने के लिए RBI ने अनिवार्य किया है कि ₹500 से अधिक के सभी डिजिटल लेनदेन पर बैंक तुरंत SMS अलर्ट भेजेंगे। इसके अलावा, बैंकों को डिजिटल धोखाधड़ी की रिपोर्ट करने के लिए 24×7 चैनल (जैसे हेल्पलाइन या पोर्टल) उपलब्ध कराने होंगे।

छोटे फ्रॉड के लिए मुआवजे का नया ढांचा

RBI ने पहली बार छोटे मूल्य की डिजिटल धोखाधड़ी के लिए एक निश्चित मुआवजे का प्रस्ताव रखा है। अब ₹50,000 तक के नुकसान वाले मामले मुआवजे के दायरे में आएंगे। इसके लिए मुआवजा राशि पीड़ित को शुद्ध नुकसान का 85% या ₹25,000 (जो भी कम हो) वापस मिलेगा।

यह मुआवजा एक व्यक्ति को जीवन में केवल एक बार मिल सकेगा। इसके लिए फ्रॉड की सूचना 5 दिनों के भीतर बैंक और साइबर क्राइम पोर्टल दोनों को देनी अनिवार्य होगी।

मुआवजे का गणित और भुगतान की समय सीमा

नुकसान की भरपाई के लिए RBI और बैंकों के बीच हिस्सेदारी तय की गई है। ₹29,412 से कम के नुकसान पर मुआवजे का 65% हिस्सा RBI उठाएगा, जबकि ग्राहक का बैंक और लाभार्थी बैंक 10-10% वहन करेंगे। ₹29,412 से ₹50,000 के नुकसान पर अधिकतम मुआवजा ₹25,000 तय किया गया है। इसमें RBI ₹19,118 देगा और संबंधित बैंक ₹2,941 प्रत्येक देंगे।

बैंकों को आवेदन के 5 दिनों के भीतर ग्राहक को मुआवजे का भुगतान करना होगा। बैंक बाद में त्रैमासिक आधार पर RBI से अपने हिस्से की प्रतिपूर्ति (Reimbursement) मांग सकेंगे।

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