छत्तीसगढ़: 100 से ज्यादा माओवादियों ने डाला हथियार, पहली बार करोड़ों की नकदी और सोना बरामद

छत्तीसगढ़ के बस्तर में ‘पूना मारगेम’ पहल के तहत 108 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें प्रमुख नेता और 44 महिलाएं शामिल थीं।
HighLights
- बस्तर में ‘पूना मारगेम’ पहल के तहत 108 माओवादियों का आत्मसमर्पण
- आत्मसमर्पण के साथ 3.61 करोड़ नकद और एक किलो सोना बरामद
- पुलिस का लक्ष्य मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से माओवाद खत्म करना
छत्तीसगढ़ के बस्तर के घने जंगलों में बुधवार को ‘पूना मारगेम-पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के तहत 108 हिंसक माओवादियों ने जगदलपुर के शौर्य भवन में आत्मसमर्पण कर दिया। माओवादी नेतृत्व के कई बड़े चेहरे मुख्यधारा में लौटे।
आदिवासी समाज ने इसका स्वागत किया और संविधान की किताब तथा गुलाब के फूल देकर मुख्यधारा में लौटे माओवादियों का सम्मान किया।
माओवादियों का सफाया
छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम व बस्तर आईजी सुंदरराज पी. की मौजूदगी में 3.29 करोड़ रुपये के इनामी 108 माओवादी हथियारों के साथ आए। इनमें 44 महिला माओवादी भी शामिल हैं। डीजीपी का कहना है कि मार्च 2026 के तय लक्ष्य के भीतर ही प्रदेश से माओवादियों का सफाया कर दिया जाएगा।
आईजी सुंदरराज पी. का कहना है कि शेष बचे माओवादियों से अपील है कि वह भी हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें। सरकार उनके सुरक्षा, कौशल विकास, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
माओवाद विरोधी अभियान में सोना और घातक हथियार बरामद
मालूम हो कि पिछले 26 महीनों में छत्तीसगढ़ में कुल 2822 माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ चुके हैं, जिनमें 2733 केवल बस्तर संभाग के हैं। माओवाद विरोधी अभियान के इतिहास में पहली बार एक ही स्थान से 3.61 करोड़ रुपये की नकद राशि और 1.64 करोड़ रुपये मूल्य का एक किलोग्राम सोना बरामद किया गया है।
आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों की सूचना पर बरामद कुल 101 घातक हथियार में सात एके-47 राइफल, 10 इंसास राइफलें, चार लाइट मशीन गन(एलएमजी), 11 बीजीएल (बैरल ग्रेनेड लांचर) व 20 नग 303 राइफल शामिल हैं।
आत्मसमर्पित माओवादियों में बस्तर के डिविजनल कमेटी सदस्य राहूल तेलाम, पण्डरु कोवासी, झितरु ओयाम और उत्तर बस्तर के डिवीसीएम मल्लेश, डीवीसीएम कोसा मंडावी के साथ-साथ पीएलजीए बटालियन नंबर-एक के कमांडर मुचाकी भी शामिल हैं। उनके साथ आने से यह समर्पण न केवल संख्या में बड़ी घटना है बल्कि माओवादी नेतृत्व में आए ऐतिहासिक बदलाव का संकेत भी देता है।



