अंतरराष्ट्रीय

1200 मिसाइलों के साथ चार देश थे निशाने पर… ट्रंप ने बताया क्या था ईरान का मेगा प्लान

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने पिछले चार महीनों से मध्य पूर्वी देशों की ओर हजारों मिसाइलें तैनात कर रखी थीं, जिसका मकसद पूरे क्षेत्र पर नियंत्रण करना था।

HighLights

  1. ईरान ने मध्य पूर्व में हजारों मिसाइलें तैनात की थीं
  2. ट्रंप का दावा, ईरान की नौसेना पूरी तरह नष्ट
  3. मोजतबा खामेनेई घायल पर अभी भी जिंदा हैं

 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के ‘द ब्रायन किलमीड शो’ को दिए इंटरव्यू में ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

ट्रंप ने कहा कि पिछले चार महीनों से ईरान ने हजारों मिसाइलें मध्य पूर्वी देशों की ओर तैनात कर रखी थीं और वह पूरे क्षेत्र पर कंट्रोल करने की तैयारी में थे।खासकर उन्होंने बताया कि ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, ओमान और सऊदी अरब पर 1,200 मिसाइलें साध रखी थीं।

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क्या था ईरान का प्लान?

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हालिया हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा था कि वे शहीदों का बदला लेने से पीछे नहीं हटेंगे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को तेहरान में अमेरिकी-इजरायली हमलों में मोजतबा खामेनेई के पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई थी। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इस हमले में खुद मोजतबा भी घायल होकर कोमा में चले गए। ट्रंप ने खामेनेई की हालत पर कहा, ‘मुझे लगता है कि वे जिंदा हैं। वे चोटिल हैं, लेकिन किसी रूप में जिंदा हैं।’

डरने की जरूरत नहीं है:ट्रंप

ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के गुजरने पर जोर देते हुए कहा कि जहाजों को बिना डर के गुजरना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना नहीं बची है और अमेरिका ने उसके सभी जहाज डुबो दिए हैं। ट्रंप ने कहा, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरें और कुछ साहस दिखाएं। उन्हें डरने की कोई बात नहीं है। उनके पास नौसेना नहीं है और हमने उनके सभी जहाज डुबो दिए।’

यह दावा अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच आया है, जहां ईरान ने जवाबी हमलों में कई देशों को निशाना बनाया है। क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसका असर पड़ रहा है। ट्रंप के बयानों से लगता है कि अमेरिका ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने में सफल रहा है, लेकिन तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है

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