युद्ध स्मारक के खिलाफ याचिका दायर करने वाले को सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, पूछा- किसके इशारे पर आए हो?

सुप्रीम कोर्ट ने देहरादून में युद्ध स्मारक निर्माण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता से बलिदानियों का सम्मान करने को कहा और पूछा कि वह किसके इशारे पर आए हैं।
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने देहरादून युद्ध स्मारक याचिका पर सुनवाई से इनकार किया।
- कोर्ट ने याचिकाकर्ता से बलिदानियों का सम्मान करने को कहा।
- सीजेआई ने याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस की चेतावनी दी।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को देहरादून जिले में युद्ध स्मारक निर्माण के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता से कहा कि वह बलिदानियों का सम्मान करें। पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि क्या आपको युद्ध स्मारक के निर्माण से कोई समस्या है?
शीर्ष अदालत उत्तराखंड हाई कोर्ट के जनवरी के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। हाई कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जिस भूमि पर युद्ध स्मारक का निर्माण होना है, वह वन भूमि है। इसलिए उस पर निर्माण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
कारण बताओ नोटिस जारी करने की चेतावनी
याचिकाकर्ता की दलीलों पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा-देश के लिए प्राणों की आहुति देने वालों के प्रति कुछ सम्मान तो रखें। पीठ ने टिप्पणी की कि हाई कोर्ट को इस याचिका को जुर्माने के साथ खारिज करना चाहिए था।
सीजेआई ने कहा कि हम याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी करेंगे। उन्हें आकर स्पष्टीकरण देना होगा और हम इस बात की जांच करेंगे कि वह किसके कहने पर यह याचिका दायर कर रहे हैं?
सुभाष चंद्र बोस के भतीजे की याचिका पर सुनवाई से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भतीजे द्वारा दायर एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें टोक्यो के रेनकोजी मंदिर से बोस की मानी जाने वाली अस्थियों को भारत लाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जायमाल्या बागची और विपुल एम.पंचोली की पीठ ने याचिका पर विचार करने में अनिच्छा दिखाई, जिसके बाद याचिकाकर्ता आशीष राय के लिए पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे वापस लेने की अनुमति मांगी।



