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विदेश नीति के निर्णय राष्ट्रीय हित में होते हैं: विदेश मंत्री एस जयशंकर

नई दिल्ली, दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि यूक्रेन को व्यापार संबंधी मुद्दों से जोड़ना सही बात नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति हमेशा देश के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर बनाई और लागू की जाती है।

विदेश मंत्री ने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कहा कि विश्व में वर्तमान जटिल राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों में भारत की विदेश नीति सतर्क और संतुलित रहती है। उन्होंने विशेष रूप से यूक्रेन को लेकर चल रही बहस पर कहा कि इस मुद्दे को व्यापार से जोड़ना अनुचित होगा। “हमारे निर्णय देश की समृद्धि और सुरक्षा के लिए होते हैं, न कि किसी राजनीतिक दबाव में आकर,” उन्होंने कहा।

जयशंकर ने यह भी बताया कि भारत हमेशा से विश्व के साथ अपने स्थायी और संतुलित संबंध बनाए रखने का पक्षधर रहा है। “हमारा दृष्टिकोण सभी देशों के साथ पारदर्शिता और व्यावसायिकता पर आधारित है। हम किसी भी देश के साथ व्यापारिक मामले में निष्पक्ष रवैया अपनाते हैं,” उन्होंने जोड़ा।

विदेश मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारत विश्व राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और ऐसे समय में जहां कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं संघर्ष की स्थिति में हैं, भारत का रुख हमेशा सकारात्मक और स्थिरता को बढ़ावा देने वाला रहेगा। “हम किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए संवाद और सहयोग में विश्वास करते हैं,” उन्होंने कहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर के इन बयानों से यह जाहिर होता है कि भारत अपने विदेश नीति निर्णयों को केवल आर्थिक लाभ या व्यापारिक मसलों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि यह सम्पूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता की दृष्टि से सोचता है। यह नीति देश को वैश्विक मंच पर मजबूत और सम्मानित स्थिति दिलाने में सहायक साबित हो रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत ने यूक्रेन संकट पर संतुलित और विचारशील नीति अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और शांति स्थापित करने के प्रयास जारी रखे हैं। विदेश मंत्री का यह बयान इस नीति की पुनः पुष्टि करता है।

इस प्रकार यह स्पष्ट है कि भारत की विदेश नीति स्वयं में एक समग्र रणनीति है जो देश के हितों को प्राथमिकता देती है और किसी भी बहाने से राष्ट्रीय हितों को समझौता नहीं करती। विदेश मंत्री एस जयशंकर का यह बयान इस सोच का समर्थन करता है कि देश के निर्णय हमेशा देशहित में लिए जाते हैं चाहे वैश्विक परिस्थितियां कैसी भी हों।

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