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कभी नहीं होगा: उत्तर कोरिया ने क्वाड के न्यूक्लियर निराकरण के आग्रह को ठुकराया

सियोल, दक्षिण कोरिया। उत्तर कोरिया ने क्वाड (QUAD) समूह की अपनी नाभिकीय शक्ति समाप्त करने की अपील को जोरशोर से खारिज करते हुए कहा है कि वह कभी भी अपने परमाणु हथियारों को छोड़ने वाला नहीं है। विदेश मंत्रालय ने क्वाड देशों पर अमेरिकी प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया और इसे अपनी आंतरिक मामलों में दखलंदाजी बताया।

क्वाड चार देशों- भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका- का एक सामरिक समूह है जो क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापक वैश्विक मुद्दों पर सहयोग करता है। हाल ही में इस समूह ने उत्तर कोरिया के खिलाफ अपनी एकजुटता जाहिर करते हुए वैश्विक शांति के लिए कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण न्यूक्लियर निराकरण पर जोर दिया।

उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय के एक बयान में कहा गया कि क्वाड का यह आह्वान पूरी तरह से अव्यावहारिक है और यह समूह अमेरिकी विदेशी नीति का एक उपकरण मात्र है जो अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है। उत्तर कोरिया का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है और इसे कभी भी स्थगित या समाप्त नहीं किया जाएगा।

क्वाड देशों ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि वे उत्तर कोरिया के वांस्पतिक हथियार कार्यक्रम की कड़ी निंदा करते हैं और क्षेत्र एवं विश्व के स्थिरता और शांति के लिए उसकी निरस्त्रीकरण प्रक्रिया जरूरी मानते हैं। उन्होंने दुष्चक्र जारी रखने पर उत्तर कोरिया पर कड़े प्रतिबंध लगाने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के साथ मिलकर काम करने पर भी बल दिया है।

विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर कोरिया की यह प्रतिक्रिया दक्षिण एशिया में जारी तनाव को बढ़ा सकती है, खासकर जब अमेरिका और उसके सहयोगी इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, यह भी देखा जा रहा है कि भारत, क्वाड में शामिल होने के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा में अपनी भूमिका को बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।

उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को वर्षों से चिंतित किया हुआ है। पारंपरिक तौर पर, देश की सरकार इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की गारंटी मानती है और इसलिए किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के प्रति हमेशा असहयोगी रहती है।

इस परिप्रेक्ष्य में क्वाड की अपील को उत्तर कोरिया की नीतिगत असहमति माना जा सकता है, जो क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करने वाली एक महत्वपूर्ण घटना है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मतभेदों के बावजूद संवाद और कूटनीतिक प्रयास जारी रखना आवश्यक है ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापना संभव हो सके।

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि उत्तर कोरिया अपनी परमाणु क्षमताओं के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और क्वाड देशों की मांगों को कतई स्वीकार नहीं करेगा। क्षेत्रीय देशों को इससे निपटने के लिए और भी सतर्कता और सहकार्य का प्रदर्शन करना होगा ताकि तनाव को नियंत्रित किया जा सके।

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