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वाराणसी/लखनऊ, 28 मई 2026: उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में चल रही डी.एल.एड (D.El.Ed) परीक्षा में एक बार फिर बड़े स्तर पर नकल का खेल सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में परीक्षा केंद्रों के अंदर छात्र खुलेआम मोबाइल फोन लेकर बैठे नजर आ रहे हैं और पेपर की रिकॉर्डिंग कर रहे हैं। इन्विजिलेटर की मौजूदगी में ही यह सब हो रहा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठ गए हैं।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि छात्र बिना किसी रोक-टोक के फोन निकालकर सवाल हल कर रहे हैं और उन्हें ग्रुप में शेयर भी कर रहे हैं। एक वीडियो में छात्र कहते नजर आ रहे हैं, “पेपर हो रहा है, कैमरा ऑन है।” ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसके बाद अभ्यर्थी और अभिभावक नाराजगी जता रहे हैं।
सिस्टम की लापरवाही?
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद ढीली है। मोबाइल चेकिंग महज नाममात्र की हो रही है। छोटे स्मार्टफोन, इयरपीस और अन्य गैजेट्स आसानी से अंदर ले जाया जा रहा है। कई केंद्रों पर पर्याप्त स्टाफ न होने और इन्विजिलेटरों की लापरवाही को इसकी मुख्य वजह बताया जा रहा है।
एक अभ्यर्थी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “सेंटर पर सिर्फ फॉर्मलिटी चेकिंग होती है। जो लोग पैसे देकर आते हैं, उन्हें खुली छूट मिल जाती है। सच्ची मेहनत करने वाले छात्रों का मनोबल टूट रहा है।”
पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामले
यह पहला मौका नहीं है। पिछले साल भी डीएलएड परीक्षा के दौरान अजमगढ़ और अन्य जिलों में नकल के वीडियो वायरल हुए थे। शिक्षा विभाग ने हर बार “जांच” का आश्वासन दिया, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नजर नहीं आया।
शिक्षा मंत्री के कार्यालय से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, हालांकि सूत्रों का कहना है कि वायरल वीडियो की जांच के आदेश दिए गए हैं और दोषी केंद्रों पर कार्रवाई की जाएगी।
मांगें:-
सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी और जामर की अनिवार्य स्थापना
बायोमेट्रिक एंट्री व्यवस्था
दोषी छात्रों, इन्विजिलेटरों और केंद्र संचालकों पर सख्त सजा
परीक्षा प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाना
डीएलएड परीक्षा शिक्षक बनने का महत्वपूर्ण द्वार है। अगर यहां नकल की संस्कृति बनी रही तो भविष्य के शिक्षकों की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। अभ्यर्थी अब सोशल मीडिया पर #SaveDElEdExam और #StopCheating hashtags के साथ आवाज उठा रहे हैं।
क्या सरकार इस बार ठोस कदम उठाएगी या फिर जांच रिपोर्ट तक मामला ठंडा पड़ जाएगा? सवाल सभी ईमानदार छात्रों का है।



