मिलिए एंटोइन मोसेस से: कैनेडियन ‘पेड़ प्रेमी’ ने केन्याई तट पर मात्र 24 घंटे में 47,460 पेड़ लगाकर बनाया दूसरा गिनीज विश्व रिकॉर्ड

नाइरोबी, केन्या। कैनेडा के एक पर्यावरण प्रेमी एंटोइन मोसेस ने हाल ही में केन्या के तटीय इलाके में 24 घंटे के भीतर 47,460 पेड़ लगाकर अपने नाम दूसरा गिनीज विश्व रिकॉर्ड दर्ज कराया है। यह उपलब्धि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है और लोगों में पेड़ लगाने के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक साबित होगी।
एंटोइन ने इस अभूतपूर्व प्रयास के जरिए विश्व के सामने यह संदेश दिया है कि व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयास से पर्यावरण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। मोसेस का मानना है कि पेड़ पर्यावरण के लिए जीवनदायिनी हैं और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में उनका योगदान अतुलनीय है।
इस रिकॉर्ड तोड़ अभियान में उन्होंने स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम किया। स्थानीय युवाओं ने भी इस पहल में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे उन्हें पर्यावरण संरक्षण के महत्व का प्रत्यक्ष अनुभव हुआ। यह पहल व्योमंडल में हरियाली बढ़ाने और मिट्टी कटाव रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
एंटोइन मोसेस ने पिछले वर्षों में भी पेड़ लगाने के कई अभियान चलाए हैं। उनका यह दूसरा विश्व रिकॉर्ड एक प्रेरणा है जो वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। इसके साथ ही उनकी यह सफलता डिजिटल माध्यमों पर भी व्यापक रूप से चर्चा में रही है, जिससे कई अन्य देशों में भी ऐसे अभियानों को बढ़ावा मिला है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण से पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार होगा, हवा साफ होगी और जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रयास से स्थानीय जल स्रोतों की गुणवत्ता में भी सुधार की उम्मीद है।
केन्या सरकार ने भी इस उपलब्धि की सराहना की है और पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्य कदम उठाने पर जोर दिया है। स्थानीय प्रशासन ने भविष्य में ऐसे और अभियानों के आयोजन की योजना बनाना शुरू कर दी है ताकि देश भर में स्थायी हरित आवरण को बनाए रखा जा सके।
अंत में, एंटोइन मोसेस की यह उपलब्धि हमें याद दिलाती है कि प्रकृति की रक्षा के लिए छोटे-छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। उनके प्रयास से प्रेरित होकर अधिक से अधिक लोग पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने के लिए तत्पर होंगे, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।



