गौमाता को राष्ट्रीय माता घोषित करने की मांग, अधिवक्ताओं ने डीएम को सौंपा ज्ञापन
गौसंरक्षण के लिए प्रभावी कानून, गौशालाओं की निगरानी और निराश्रित गौवंश की व्यवस्था की उठाई मांग

फतेहपुर। संवाददाता बृजेन्द्र मौर्य
फतेहपुर में गाय को राष्ट्रीय माता घोषित किए जाने की मांग एक बार फिर चर्चा में आ गई है। जिले के अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपकर गौमाता को राष्ट्रीय माता का दर्जा देने की मांग की है।
कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे अधिवक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है, लेकिन वर्तमान समय में गौवंश की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने सरकार से इस विषय पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।
अधिवक्ताओं का कहना है कि देशभर में कई गौशालाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। अनेक स्थानों पर गायों को पर्याप्त चारा, पानी और चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। वहीं बड़ी संख्या में गौवंश सड़कों पर निराश्रित अवस्था में घूमता दिखाई देता है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि यदि गाय को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिया जाता है तो उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार अधिक प्रभावी नीतियां बना सकेगी। साथ ही गौवंश की सुरक्षा, चिकित्सा और रखरखाव के लिए विशेष योजनाओं को लागू करने में भी मदद मिलेगी।
ज्ञापन के माध्यम से अधिवक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार से गौवंश की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून बनाने, गौशालाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने तथा सड़कों पर घूम रहे निराश्रित गौवंश के संरक्षण की समुचित व्यवस्था किए जाने की मांग की है।
अधिवक्ताओं ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांग पर गंभीरता से विचार करेगी और गौसंरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। फिलहाल यह मांग जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।



