भारत 2047 से पहले काला टकिया रोग मिटाएगा, लक्ष्य: राष्ट्रपति मर्मु

रांची, झारखंड। राष्ट्रपति द्रौपदी मर्मु ने हाल ही में राज्यों से आग्रह किया है कि वे काला टकिया रोग (सिकल सेल एनीमिया) को हल्के में न लें और इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास करें। विशेष रूप से आदिवासी समुदायों के बीच इस रोग की रीडिंग और निगरानी पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है जिसे मिलकर ही समाप्त किया जा सकता है।
राष्ट्रपति मर्मु ने कहा, “सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है जो जीवन को प्रभावित करती है और इसे नज़रअंदाज़ करना देश के लिए नुकसानदेह होगा। हम सबका यह दायित्व है कि हम इस रोग की जानकारी फैलाएं, परीक्षण बढ़ाएं और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करें।” उन्होंने 2047 तक इस रोग को समाप्त करने का अभूतपूर्व लक्ष्य रखा है, जो भारत के स्वतंत्रता के 100 वर्षों के समारोह के साथ जुड़ा है।
सिकल सेल एनीमिया मुख्य रूप से रक्त की लाल कोशिकाओं को प्रभावित करता है जिससे ऑक्सीजन का संचार बाधित होता है। यह बीमारी खासतौर पर भारत के आदिवासी क्षेत्रों में प्रचलित है, जहां जागरूकता की कमी और संसाधनों की अनुपलब्धता के कारण इसके उपचार में बाधाएं आती हैं। इस दिशा में राज्यों को व्यापक जागरूकता अभियान चलाने, टेस्टिंग सुविधाएं बढ़ाने और प्रभावित व्यक्तियों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है।
आरोग्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियों का मुकाबला केवल चिकित्सा हस्तक्षेप से नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता और जन सहयोग से भी संभव है। इसलिए आदिवासी इलाकों में स्थानीय समुदायों के साथ तालमेल बनाकर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार जरूरी है।
देश भर में कई संगठनों और राज्यों ने इस अभियान में पहले से ही कदम बढ़ाए हैं, जिससे हाल के वर्षों में रोग की पहचान और उपचार में सुधार हुआ है। परंतु राष्ट्रपति मर्मु ने आवाहन किया है कि यह प्रयास और मजबूत किया जाए और हर संभव सहायता प्रदान की जाए ताकि भारत इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त कर सके।
इस दिशा में सरकार भी विभिन्न योजनाएं और स्वास्थ्य कार्यक्रम चला रही है, जिनमें निःशुल्क जांच, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की तैनाती और रोगियों को आर्थिक सहायता शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि हर नागरिक, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मिलकर काम करें तो 2047 तक सिकल सेल एनीमिया का अंत संभव है।
इस संदेश के साथ राष्ट्रपति मर्मु ने देशवासियों से भी आग्रह किया है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करें और उन परिवारों तथा समुदायों तक जानकारी पहुंचाएं जो इस बीमारी से प्रभावित हैं। केवल जागरूकता और एकजुट प्रयासों से ही हम एक स्वस्थ और समृद्ध भारत की कल्पना को साकार कर पाएंगे।



