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आंध्र प्रदेश ने जल सुरक्षा के लिए 123 शहरी निकायों में रिसाइकल्ड पानी उपयोग नीति को मंजूरी दी

आंध्र प्रदेश, भारत – आंध्र प्रदेश सरकार ने अपने 123 शहरी स्थानीय निकायों में जल सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से उपचारित अपशिष्ट जल पुनः उपयोग नीति को स्वीकृति दे दी है। यह नीति राज्य में शहरी जल आपूर्ति की मांग को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। योजना के अनुसार, 2030 तक कम से कम 20% शहरी जल मांग को उपचारित जल के माध्यम से पूरा किया जाएगा।

इस नीति की मुख्य विशेषता है कि यह चरणबद्ध लक्ष्यों के साथ सभी शहरी निकायों में एक व्यापक रणनीति अपनाएगी। इससे जल संकट की स्थिति में कमी आने की संभावना है तथा पेयजल संसाधनों पर दबाव घटेगा। आंध्र प्रदेश जल संसाधन विभाग ने बताया है कि इस पहल से न केवल पानी की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आबादी और औद्योगीकरण के कारण पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके परिणामस्वरूप पारंपरिक जल स्रोतों पर दबाव बढ़ा है, जिसने जल संकट की गंभीर स्थिति पैदा की है। उपचारित अपशिष्ट जल पुनः उपयोग नीति के तहत, नालियों से आने वाले जल को उचित तकनीकों द्वारा शोधन करके सीवर नेटवर्क से पुनः उपयोग में लाया जाएगा।

सरकार का कहना है कि इससे न केवल पेयजल की बचत होगी, बल्कि जल प्रदूषण में भी कमी आएगी। नीति के क्रियान्वयन के लिए संबंधित शहरी निकायों को अंदाजन समयबद्ध लक्ष्य दिए गए हैं जिनका सख्ती से पालन किया जाएगा। इस नीति से सरकारी एवं निजी क्षेत्रों में जल प्रबंधन की दक्षता बढ़ेगी और सतत विकास के लक्ष्य की प्राप्ति में मदद मिलेगी।

जल मंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “यह नीति आंध्र प्रदेश के लिए मील का पत्थर है जो हमें जल संरक्षण और सुरक्षा दोनों में आगे बढ़ाएगी। हम इस नीति को सफल बनाने के लिए समर्पित हैं।” राज्य सरकार ने जनता से भी इस नीति के प्रति सहयोग की अपील की है ताकि जल संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास देश के अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करेंगे। जल संकट के प्रबंधन में इस प्रकार की नीतियां लाना आवश्यक है ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे और आने वाली पीढ़ियां भी स्वच्छ और पर्याप्त जल का उपयोग कर सकें।

इस नीति के तहत पूरे आंध्र प्रदेश में जल पुनर्चक्रण के लिए नई तकनीकों का प्रयोग और पुराने अवसंरचनाओं का सुधार भी शामिल है। राज्य सरकार ने इसके लिए धन और संसाधन आवंटित किए हैं ताकि नीतिगत लक्ष्यों को समय पर हासिल किया जा सके।

आंध्र प्रदेश की यह पहल जल सुरक्षा को सुनिश्चित करने वाली एक प्रभावशाली रणनीति के रूप में देखी जा रही है। जैसे-जैसे देश में शहरीकरण बढ़ रहा है, वर्ष 2030 तक जल की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की नीतियां बेहद आवश्यक हो जाएंगी। यह नीति आंध्र प्रदेश को जल संकट से निपटने में सक्षम बनाएगी और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी समर्थन देगी।

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