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Gold vs Silver-Copper Investment: सोना कुछ समय से स्थिर है, लेकिन चांदी और तांबा 2026 में निवेश के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभरे हैं।

HighLights

  1. चांदी-तांबा 2026 के हॉट मेटल ट्रेड
  2. चांदी की कीमत लगभग दोगुनी हुई
  3. कॉपर की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर

Gold vs Silver-Copper Investment: सोना जहां पिछले कुछ महीनों से सीमित दायरे में फंसा हुआ है, वहीं चांदी और कॉपर 2026 में सबसे हॉट मेटल ट्रेड बनकर उभरे हैं। दोनों धातुओं ने ऐसी रफ्तार पकड़ी है कि गोल्ड की चमक फीकी (Gold Price Today) पड़ती दिखाई दे रही है। वैश्विक सप्लाई में भारी कमी और तेज निवेश प्रवाह ने इन धातुओं को रिकॉर्ड स्तर की ओर धकेल दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चांदी की कीमत (Silver Price Today) इस साल लगभग दोगुनी हो चुकी है, जिसमें सबसे तेज उछाल पिछले दो महीनों में आया है। लंदन मार्केट में ऐतिहासिक सप्लाई क्रंच, भारत से बढ़ती मांग और सिल्वर ETF में तेजी से खरीदारी इन तीन कारणों ने कीमतों को बढ़ावा दिया है।

इन धातुओं को लेकर क्या बोले एक्सपर्ट?

फाइनेंशियल सर्विसेस कंपनी मारेक्स ग्रुप (Marex Group) के विश्लेषक एड मेयर (Ed Meir) बताते हैं कि, “इस बार सिल्वर में जो पैराबोलिक मूव दिखा है, वह पहले कभी नहीं देखा गया। खरीदारी बहुत तेज और कम समय में हुई है।” सोने की बात करें तो 20 अक्टूबर को रिकॉर्ड बनाने के बाद से गोल्ड लगभग स्थिर है, जबकि चांदी में 11% और कॉपर में करीब 9% की तेजी दर्ज हुई है।

ETF में पैसा तेजी से आया, उतार-चढ़ाव भी चरम पर

दुनिया के सबसे बड़ा सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) आईशेयर सिल्वर ट्रस्ट (iShares Silver Trust) में पिछले हफ्ते लगभग 1 अरब डॉलर का इनफ्लो आया, जो गोल्ड ETF से भी ज्यादा है। ETF वॉलैटिलिटी 2021 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है, जब सिल्वर कुछ समय के लिए ‘meme stock’ की तरह ट्रेड हो रहा था।

5,000 से ज्यादा सिल्वर ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट ट्रेड हुए

Global X ETFs के विश्लेषक ट्रेवर येट्स बताते हैं कि, “पश्चिमी निवेशक अभी भी धातुओं में कम एक्सपोस्ड हैं, इसलिए ETF में और पैसे आने की पूरी संभावना है। CME डेटा बताता है कि रिटेल ट्रेडर्स भी बाजार में तेजी से जुड़ रहे हैं। केवल इस हफ्ते 5,000 से ज्यादा सिल्वर ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट ट्रेड हुए, जो फरवरी में 80 से 85 डॉलर तक की कीमतों पर दांव लगा रहे हैं।

कॉपर भी बना सुपरस्टार, सप्लाई शॉर्टेज और डिमांड का डबल इफेक्ट

कॉपर में वित्तीय निवेश भले कम हो, लेकिन एआई डेटा सेंटर (AI Data Center), इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और ग्रीन एनर्जी (Green Energy) की तेजी से बढ़ती मांग ने इसे structurally bullish बना दिया है। पिछले हफ्ते कॉपर 11,600 डॉलर प्रति टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

एक्सपर्ट बोले- अब नीचे नहीं आएंगी कॉपर की कीमतें

फाइनेंशियल प्रोडक्ड्स और सर्विसेज प्रोवाइड करने वाली कंपनी स्टोनेक्स फाइनेंशिल (StoneX Financial) के ट्रेडर झू शियाओयू के मुताबिक, “बड़ी खदानों में रुकावटें और बढ़ती वैश्विक मांग, दोनों मिलकर कॉपर की कीमतों को नीचे नहीं आने देंगे।”

इधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप सरकार द्वारा कॉपर पर संभावित टैरिफ लगाने की घोषणा से अमेरिकी बाजार में कीमतें और बढ़ीं, जिससे वैश्विक ट्रेड फ्लो उलट गया। Mercuria, Trafigura और Glencore जैसी कंपनियां इस अंतर का फायदा उठाते दिखीं।

यानी साफ शब्दों में कहें तो सोना भले स्थिर हो, लेकिन चांदी और कॉपर 2026 के सबसे बड़े स्टार बनते दिख रहे हैं। सप्लाई की कमी, बढ़ती मांग और निवेशकों की आक्रामक पोजिशनिंग ने इन दोनों धातुओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है।

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