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दिल्लीवालों को नए साल का तोहफा, CM रेखा गुप्ता बांटेगी 6476 फ्लैट्स; मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि नए साल से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के परिवारों को फ्लैटों की चाबियां मिलनी शुरू हो जाएंगी। डूसिब की ईडब्ल्यूएस कॉलोनियों में सामुदायिक सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है, ताकि गरीबों को सम्मानजनक और सुविधायुक्त जीवन मिल सके। सावड़ा घेवरा जैसी कॉलोनियों में 6,476 खाली फ्लैटों की मरम्मत के लिए ₹27.50 करोड़ मंजूर किए गए हैं। यह पहल सामाजिक न्याय और समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा देगी।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि नए साल से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) की पात्र गरीब परिवारों को फ्लैटों की चाबियां सौंपी जाना शुरू हो जाएगा। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) की मौजूदा ईडब्ल्यूएस कॉलोनियों में सामुदायिक सुविधाओं का विकास तेजी से किया जा रहा है, ताकि गरीबों को केवल छत नहीं बल्कि सम्मानजनक और सुविधायुक्त जीवन मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल घर बनाकर जिम्मेदारी पूरी करना नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जलापूर्ति, हरित क्षेत्र और आजीविका से जुड़ी सुविधाएं एक साथ उपलब्ध कराना है। सावड़ा घेवरा जैसी बड़ी कॉलोनियों में बुनियादी और सामाजिक ढांचे का विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सावड़ा घेवरा में 37.81 एकड़ क्षेत्र में विकसित कॉलोनी में 2012 से 2020 तक 7,620 फ्लैट बनाए गए, जिनमें से 6,476 अभी खाली हैं और कई की मरम्मत जरूरी है।

कॉलोनी में 100 प्रतिशत सीवरेज नेटवर्क, 39 आवासीय पार्क (22,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र), भूमिगत जल टैंक, बूस्टर स्टेशन, ठोस कचरा प्रबंधन के लिए चार संग्रहण केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्राथमिक स्कूल, डिस्पेंसरी, स्थानीय शॉपिंग सेंटर, सर्विस मार्केट, दूध बूथ और ऑटो-टैक्सी स्टैंड जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। आसपास के 1.5 से 3 किलोमीटर दायरे में बस स्टॉप, मेट्रो स्टेशन, पुलिस स्टेशन, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र पहले से मौजूद हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी डूसिब ईडब्ल्यूएस कॉलोनियों में सामुदायिक सुविधाओं को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। 2,500 खाली फ्लैटों की मरम्मत के लिए 27.50 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। यह केवल आवास परियोजना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी शहरी विकास की मुहिम है, ताकि राजधानी का कोई गरीब या झुग्गीवासी सम्मानजनक आवास से वंचित न रहे।

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