पॉलिटिक्स

राज्यसभा चुनाव: TMC ने बाबुल सुप्रियो-राजीव कुमार समेत चार चेहरों पर लगाया दांव, ममता का ‘प्लान बंगाल’

तृणमूल कांग्रेस ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए अपने चार उम्मीदवारों की घोषणा की है। पार्टी ने बाबुल सुप्रियो, पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी और अभिनेत्री कोयल मल्लिक को नामित किया है।

HighLights

  1. तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा की।
  2. बाबुल सुप्रियो, राजीव कुमार, कोयल मल्लिक नामित।
  3. संतुलित समीकरण बनाने का पार्टी का प्रयास।

 आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी, जिसमें पार्टी ने मंत्री से लेकर पूर्व आइपीएस, कानून और कला जगत की जानी-मानी हस्तियों को शामिल कर एक संतुलित समीकरण बनाने का प्रयास किया है।

पार्टी ने राज्यसभा के लिए बाबुल सुप्रियो, बंगाल के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार, प्रसिद्ध वकील मेनका गुरुस्वामी और बांग्ला फिल्म जगत की लोकप्रिय अभिनेत्री कोयल मल्लिक को अपना उम्मीदवार बनाया है।

बाबुल सुप्रियो पर दांव

बाबुल सुप्रियो एक अनुभवी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं, जो वर्तमान में बंगाल सरकार में मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके साथ ही पूर्व डीजीपी राजीव कुमार का नाम एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है, जिन्होंने राज्य पुलिस बल के शीर्ष पद पर लंबे समय तक सेवा दी है।

वहीं, कानूनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाने वाली मेनका गुरुस्वामी सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील हैं और वे अपने संवैधानिक अधिकारों की वकालत के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हैं। इस सूची में बांग्ला सिनेमा की प्रमुख अभिनेत्री कोयल मल्लिक का नाम शामिल कर पार्टी ने कला और जनसंपर्क के क्षेत्र से भी एक मजबूत चेहरा उतारा है।

तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि ये चारों उम्मीदवार पार्टी की उस वैचारिक विरासत को आगे ले जाने में सक्षम हैं, जो आम लोगों के अधिकारों और भारतीय गरिमा के संरक्षण पर केंद्रित है।

पार्टी ने दी शुभकामनाएं

इस चयन को आगामी संसद सत्र में बंगाल की आवाज को और अधिक मुखरता से उठाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी आलाकमान ने इन सभी प्रत्याशियों को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई है कि वे संसद के उच्च सदन में जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से रखेंगे।

विवादों में रहे हैं राजीव कुमार

इस सूची में सबसे चर्चित नाम पूर्व डीजीपी व पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार का है। सारधा और रोजवैली चिटफंड घोटालों की जांच के दौरान राजीव कुमार की भूमिका लंबे समय से विवादों में रही है।

वर्ष 2019 में जब सीबीआई ने उनसे पूछताछ की कोशिश की थी, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनके समर्थन में कोलकाता में अभूतपूर्व धरना दिया था, जिसे उन्होंने ‘संविधान बचाने की लड़ाई’ का नाम दिया था। उन पर जांच के दौरान साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगे थे।

SC की टिप्पणी

पार्टी का यह फैसला केंद्रीय जांच एजेंसियों के दबाव के बीच एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। हाल ही में राजनीतिक परामर्श फर्म ‘आइ-पैक के परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के दौरान भी भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला था।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तत्कालीन डीजीपी राजीव कुमार के साथ स्वयं घटनास्थल पर पहुंचकर कार्रवाई का विरोध किया था, जिसके बाद ईडी ने सर्वोच्च न्यायालय में इसे ‘शक्ति का दुरुपयोग’ बताया है और नोटिस भी जारी किया था।

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