राष्ट्रीय

बेंगलुरु पुलिस का एक्शन: नौकरी के नाम पर बेरोजगारों से 25 करोड़ की ठगी करने वाले पति-पत्नी गिरफ्तार

बेंगलुरु में एक दंपति, जेसन डिसूजा और लवीना, को सैकड़ों बेरोजगारों से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 25 करोड़ रुपये ठगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

HighLights

  1. दंपति ने नौकरी के नाम पर 25 करोड़ रुपये ठगे।
  2. कोर्ट में ‘डी-ग्रुप’ पदों का वादा कर फंसाया।
  3. पहले भी धोखाधड़ी के आरोप में हो चुके हैं गिरफ्तार।

बेंगलुरु में एक दंपति को कथित तौर पर सैकड़ों नौकरी चाहने वालों को कोर्ट सिस्टम में सरकारी पदों का वादा करके ठगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस घोटाले के जरिए उन पर करीब 25 करोड़ रुपये की हेराफेरी करने का आरोप है।

आरोपियों की पहचान जेसन डिसूजा और लवीना के रूप में हुई है। इनको सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने एक ऐसे बड़े रैकेट को चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। जांचकर्ताओं का कहना है कि यह बेरोजगार लोगों और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को निशाना बनाते थे।

हर पीड़ित से 10 से 25 लाख रुपये तक वसूले

पुलिस के अनुसार, इस जोड़े ने कथित तौर पर विभिन्न अदालतों में ‘डी-ग्रुप’ की नौकरियां दिलाने का वादा करके हर पीड़ित से 10 लाख से 25 लाख रुपये तक वसूले। इस तरह ठगी की गई कुल रकम लगभग 25 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

जब पीड़ितों ने बाद में अपनी रोजगार स्थिति के बारे में जानकारी मांगी तो कथित तौर पर आरोपी ने बहाने बनाकर जवाब देने में देरी की और आखिर में फोन उठाना ही बंद कर दिया।

पीड़ितों ने मांगी पुलिस से मदद

जब पीड़ितों को यह समझ आया कि उनके साथ धोखा हुआ है तो उनमें से कई लोगों ने CCB से संपर्क किया और शिकायतें दर्ज कराईं। बेंगलुरु के एक पुलिस स्टेशन में भी अतिरिक्त मामले दर्ज किए गए।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी अधिकारियों को पता चला कि इस जोड़े को इससे पहले 2024 में भी नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी के एक ऐसे ही मामले में गिरफ्तार किया गया था। जेल से रिहा होने के बाद कथित तौर पर उन्होंने अपनी गैर-कानूनी गतिविधियां फिर से शुरू कर दीं।

ऐसे काम करता था नेटवर्क

पुलिस की जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए एजेंटों का एक नेटवर्क तैयार कर रखा था। बताया जाता है कि ये एजेंट संभावित पीड़ितों की पहचान करते थे, उन्हें मांगी गई रकम चुकाने के लिए राजी करते थे, अपना कमीशन अपने पास रख लेते थे और बाकी बची रकम उस जोड़े को सौंप देते थे।

कुछ मामलों में पीड़ितों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बहाने प्राइवेट होटलों में बुलाया गया। वहां, उन्हें नकली ऑफर लेटर दिखाए गए ताकि उन्हें और यकीन हो जाए कि भर्ती असली है। CCB फिलहाल जांच कर रही है, ताकि घोटाले की पूरी हद का पता लगाया जा सके और भी पीड़ितों की पहचान की जा सके।

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