डायबिटिक फुट सोसायटी ऑफ इंडिया ने ग्लोबल गठबंधन बनाने का आह्वान किया

डायबिटिक फुट सोसायटी ऑफ इंडिया (DFSI) ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष वी.बी. नारायणमूर्ति के नेतृत्व में पैन-अफ्रीकन डायबिटिक फुट स्टडी ग्रुप (PADFSG) के अध्यक्ष जुल्फिकारअली जी अब्बास को एक पत्र लिखा है, जिसमें डायबिटिक फुट रोग के बचाव और अंग संरक्षण के लिए एक वैश्विक गठबंधन बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
डायबिटिक फुट की गंभीरता और वैश्विक पहल की आवश्यकता
पत्र में बताया गया है कि डायबिटिक फुट अल्सर के कारण समय से पहले मृत्यु, प्रमुख अंग कटाई, बार-बार बीमार पड़ना, विकलांगता और सामाजिक बहिष्कार होता है, लेकिन यह समस्या कम जानी-पहचानी रही है। उपलब्ध तथ्य बताते हैं कि इसके पांच साल के निधन का अनुपात कुछ कैंसर के सामान ही है। फिर भी, इस गंभीर समस्या के लिए वैश्विक निवेश और नीति स्तर पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है।
इसलिए, DFSI ने वैश्विक गठबंधन बनाने का प्रस्ताव रखा है जिसमें खुद DFSI के अलावा किंग्स कॉलेज लंदन, इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ डायबिटिक फुट सर्जन्स, डी-फुट इंटरनेशनल, अमेरिकन लिम्ब प्रिजर्वेशन सोसायटी, फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल पोडियाट्रिस्ट्स और PADFSG शामिल होंगे। इस गठबंधन का उद्देश्य रोकथाम, अंग संरक्षण, बेहतर जीवन दर, पुनर्वास, निगरानी, शोध और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) समेत सरकारों के साथ सहयोग फोकस करना होगा।
आगे की योजना और गठबंधन की रूपरेखा
पत्र के अनुसार, DFSI अगले राष्ट्रीय सम्मेलन में, जो 2 अक्टूबर 2026 को होगा, इस गठबंधन के गठन का साझा इरादा घोषित करेगा। हालांकि इस घोषणा को गठबंधन के कानूनी गठन के रूप में नहीं लिया जाएगा और न ही किसी वित्तीय या संविदात्मक दायित्व की स्वीकृति मानी जाएगी। DFSI ने PADFSG से इस प्रस्ताव पर सहमति और सम्मेलन की घोषणा के लिए समर्थन मांगा है।
इसके साथ ही पत्र में एक संयुक्त वैश्विक घोषणा का मसौदा भी शामिल था, जिस पर PADFSG से प्रतिक्रिया मांगी गई है। यदि सहमति मिली, तो प्रस्तावित है कि सम्मेलन के 30 दिनों के भीतर गठबंधन की पहली बैठक आयोजित की जाएगी।
ग्लोबल गठबंधन का उद्देश्य वैज्ञानिक नेतृत्व, नीति वकालत, क्षेत्रीय कार्यक्रम और संसाधन जुटाने के लिए साझा मंच प्रदान करना है। इसके प्रमुख लक्ष्य WHO और अन्य राष्ट्रीय सरकारों से डायबिटिक फुट रोग को एक महत्वपूर्ण चिकित्सीय स्थिति के रूप में मान्यता दिलाना, रोगी-केंद्रित निदान और देखभाल, रोकथाम और जल्दी पहचान के तरीकों को बढ़ावा देना शामिल हैं। इसके साथ ही रोग निगरानी, रजिस्ट्री विकास, अंग कटाई के बाद पुनर्वास, अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना गठबंधन का हिस्सा होगा।
प्रस्तावित घोषणा में डायबिटिक फुट रोग को समयपूर्व मृत्यु, विकलांगता और सामाजिक बहिष्कार के एक प्रमुख कारण के रूप में मान्यता देने का आह्वान किया गया है। इसके तहत WHO के निदेशक-जनरल, क्षेत्रीय निदेशकों और सदस्य राज्यों से अपेक्षा की गई है कि वे इस बीमारी के रोकथाम, अंग संरक्षण और जीवन रक्षा को डायबिटीज़ नीति में शामिल करें।
यह भी लक्ष्य रखा गया है कि 2030 तक नई डायबिटिक फुट अल्सर के बाद पांच साल की मृत्यु दर में 30% की कमी और संभावित अम्पुटेशन में 50% की कमी लाई जाए। यह घोषणा जीवन को सक्रिय, समावेशी और सम्मानजनक बनाने के लिए समन्वित प्रयासों की जरूरत पर जोर देती है।




