अंतरराष्ट्रीय

ताइवान के राष्ट्रपति का चीन पर आरोप लगाने के बाद Eswatini दौरा

प्रेटोरिया, दक्षिण अफ्रीका

ताइवान के राष्ट्रपति ने Eswatini के अपने दौरे को लेकर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है, खासकर तब जब चीन ने इस दौरे को ‘स्टोववे स्टाइल एस्केप फर्स’ यानी छुपकर भागने वाली नाटक बताया। अभी तक यह साफ नहीं है कि राष्ट्रपति ने Eswatini तक कैसे पहुंचा। यह दौरा उन आरोपों के कुछ ही दिन बाद हुआ है, जिसमें ताइवान ने चीन को अपनी यात्रा रद्द करवाने का दोषी ठहराया था।

ताइवान की सरकार का कहना है कि राष्ट्रपति का यह दौरा मित्र राष्ट्र Eswatini के साथ मजबूत संबंध बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। Eswatini ताइवान का एकमात्र आधिकारिक अफ्रीकी राजनयिक साथी है, इसलिए इस यात्रा का विशिष्ट महत्व है। राष्ट्रपति ने Eswatini के प्रधानमंत्रि और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई समझौतों पर चर्चा की।

चीन की प्रतिक्रिया में कहा गया कि उस प्रकार की यात्रा को कोई कूटनीतिक सफलता नहीं कहा जा सकता और यह ‘छुपकर भागने की कहानी’ जैसी है। चीन हमेशा से ताइवान को अपने हिस्से के रूप में मानता आया है, और उसने कई बार Eswatini जैसी जगहों पर ताइवान के संभावित प्रभाव को कमतर करने की कोशिश की है।

विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे से दक्षिणी अफ्रीकी क्षेत्र में चीन और ताइवान के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकते हैं। अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने Eswatini के साथ ताइवान के संबंधों का स्वागत किया है, जो चीन के दबाव को लेकर एक जवाबी प्रतिक्रिया प्रतीत होती है।

हालांकि, ताइवान सरकार ने अभी तक ये स्पष्ट नहीं किया है कि राष्ट्रपति ने Eswatini तक कैसे यात्रा की, इस सवाल ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। सुरक्षा और गोपनीयता के कारण इस विषय पर बहुत कम जानकारी उपलब्ध कराई गई है।

इस दौरे के दौरान, ताइवान ने Eswatini को स्वास्थ्य, शिक्षा, और कृषि क्षेत्रों में सहयोग के लिए नए प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए हैं। यह संकेत है कि ताइवान अपने सीमित अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ गहरे और मजबूत संबंध स्थापित करने पर जोर दे रहा है।

ताइवान के राष्ट्रपति के इस दौरे को एशिया व अफ्रीका के बीच कूटनीतिक तनातनी और भी जटिल कर सकता है। Eswatini के साथ इस नजदीकी का मतलब है कि ताइवान एक कठिन कूटनीतिक युद्ध में रणनीतिक मोर्चा संभाल रहा है, जहां चीन की चुनौती तेजी से बढ़ रही है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस दौरे का दोनों देशों के भविष्य के संबंधों तथा क्षेत्रीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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