स्वास्थ्य

केंद्र ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ कार्यक्रम में किया सुधार, जोड़ा मानसिक स्वास्थ्य और एनसीडी स्क्रीनिंग

नई दिल्ली, भारत – केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के विकास के तहत अब RBSK 2.0 को लॉन्च किया है, जिसमें डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड, रीयल-टाइम डेटा सिस्टम और एकीकृत प्लेटफार्मों का समावेश किया गया है। यह कदम सरकार के डिजिटल स्वास्थ्य अभियान को आगे बढ़ाने और बच्चों के लिए बेहतर स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

RBSK, जिसे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम कहा जाता है, पहले से ही देश भर में बच्चों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और देखभाल का एक व्यापक नेटवर्क प्रदान करता है। अब इस नई पहल के तहत डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक बच्चे का स्वास्थ्य इतिहास और स्क्रीनिंग डाटा संग्रहित रहेगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और बेहतर ट्रैकिंग संभव होगी।

इस कार्यक्रम में डिजिटल तकनीक का समावेश बच्चों के स्वास्थ्य निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाएगा। रीयल-टाइम डेटा सिस्टम के माध्यम से स्वास्थ्य कर्मी और अधिकारी बच्चों की स्थिति पर तुरंत अपडेट प्राप्त कर सकेंगे, जिससे इलाज की गुणवत्ता और समय पर सेवा प्रदान करना आसान होगा। यह एकीकृत प्लेटफॉर्म स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, स्कूलों और परिवारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगा।

RBSK 2.0 के अंतर्गत अब मानसिक स्वास्थ्य और गैर-संचारी रोगों (NCDs) की स्क्रीनिंग को भी शामिल किया गया है। इससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पहले से ध्यान देना संभव होगा, जो शिक्षा और समग्र विकास के लिए आवश्यक है। गैर-संचारी रोगों की जल्द पहचान से भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को रोकना भी संभव होगा।

केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारीयों ने बताया कि इस नई प्रणाली के माध्यम से भारत में बाल स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल क्रांति आएगी। वे बच्चों के लिए जारी स्वास्थ्य कार्ड को देशभर के सरकारी और निजी अस्पतालों द्वारा मान्यता प्राप्त होगी, जिससे बेहतर देखभाल को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

इसके अलावा, इस पहल से स्वास्थ्य सेवा वितरण की प्रक्रिया में बाधाएं कम होंगी और स्थानीय स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी बेहतर संसाधन मिलेंगे। उन बच्चों की पहचान जो अतिरिक्त देखभाल के हकदार हैं, अधिक कुशलता से की जा सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि RBSK 2.0 जैसी डिजिटल पहल से भारत में बचपन के रोगों की रोकथाम और स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ेगी। इससे सरकार को नीतिगत निर्णयों में सही डेटा उपलब्ध होगा और देश की जनसांख्यिकीय स्थिति में सुधार संभव होगा।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में लगभग 28 करोड़ बच्चे हैं, जिनमें से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में RBSK 2.0 का यह कदम उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ी पहल है।

इस नई डिजिटल रणनीति से भारत के बाल स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार होगा और आने वाले वर्षों में बच्चों की स्वस्थ पहचान और जीवन गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकेगी।

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